उद्धव गुट में बगावत

टीआरपी। शिवसेना (यूबीटी) में बगावत और कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे, नेता आदित्य ठाकरे और सांसद संजय राउत ने भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट पर निशाना साधते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) का यह संकट न केवल राज्य के समीकरणों को बदल रहा है, बल्कि 2024 के लोकसभा परिणामों के बाद भाजपा और विपक्षी दलों के बीच जारी खींचतान को भी नए स्तर पर ले गया है। यह घटनाक्रम सीधे तौर पर जनता के जनादेश और दलबदल विरोधी कानूनों पर बड़ी बहस छेड़ रहा है।

पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फिलहाल बागी सांसदों को अपनी बात रखने दीजिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब उन्हें उचित समय लगेगा, तब वह मीडिया को बुलाकर अपनी पार्टी का पक्ष विस्तार से रखेंगे। इस दौरान सांसद संजय राउत ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ‘छह गद्दारों को जन्म दिया है’ और स्थिति को संभालने के लिए आगे और सर्जरी करनी पड़ेगी। राउत की यह टिप्पणी उन छह सांसदों को लेकर आई है, जिनके शिंदे गुट में जाने की चर्चा जोरों पर है।

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वहीं, आदित्य ठाकरे ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए देश की सुरक्षा, महंगाई और किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पिछले 12 वर्षों से केंद्र में भाजपा की सरकार है, अगर इतने समय में भी घुसपैठ नहीं रोकी जा सकी, तो यह सरकार की विफलता है।” आदित्य ने मुख्यमंत्री के ‘ऑपरेशन टाइगर’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को राजनीतिक अभियानों की बजाय शासन और प्रशासन पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि सरकार को प्रशासन चलाना नहीं आता, तो उसे इस्तीफा दे देना चाहिए।

सांसदों की अनुपस्थिति: हाल ही में दिल्ली में हुई शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में 9 में से केवल 3 सांसद ही शामिल हुए, जिससे 6 सांसदों के पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं।

गंभीर आरोप: आदित्य ठाकरे ने दावा किया कि भाजपा का मुख्य उद्देश्य विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को तोड़कर संविधान में बदलाव करना और संसद में अपनी संख्या बल बढ़ाना है।

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पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से अब पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया और भावी रणनीति का इंतज़ार है। शिवसेना (यूबीटी) ने संकेत दिए हैं कि वे जल्द ही अपना पक्ष विस्तार से रखेंगे, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में और अधिक टकराव की संभावना है।