टीआरपी डेस्क। धमतरी में सोमवार का दिन भारी हंगामे वाला रहा। जिले के आदिवासी अंचलों के हजारों लोग सड़क पर उतर आए हैं। ये लोग अपनी बुनियादी जरूरतों को लेकर सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए हैं।
शहर के शोभाराम देवांगन चौक पर सुबह से ही भीड़ जुटने लगी थी। देखते ही देखते ये भीड़ एक बड़े आंदोलन में बदल गई। हाथ में बैनर-पोस्टर लिए ये ग्रामीण पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट की ओर निकल पड़े।
प्रदर्शनकारी आदिवासियों का कहना है कि वे अब झूठे वादों से थक चुके हैं। सालों से सड़क, पानी, बिजली और अस्पताल जैसी जरूरी चीजों की मांग कर रहे हैं। मगर नतीजा सिफर ही रहा।
ग्रामीणों के मुताबिक, उन्हें बस हर बार आश्वासन का टोकरा थमा दिया जाता है। काम के नाम पर ज़मीन पर कुछ नहीं दिख रहा है। इसी नाराजगी ने आज उन्हें सड़क पर ला खड़ा किया है।
पुलिस के इंतजाम नाकाफी
कलेक्ट्रेट की तरफ बढ़ते इन लोगों को रोकने के लिए प्रशासन ने पूरी कोशिश की। पुलिस ने समझाने का भी प्रयास किया। लेकिन प्रदर्शनकारी किसी की सुनने को तैयार नहीं थे।
हालात ऐसे बन गए कि भीड़ को नियंत्रित करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया। अनुमान है कि प्रदर्शन में 500 से 2000 के बीच ग्रामीण शामिल हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि स्थिति बिगड़े नहीं।
आर-पार के मूड में प्रदर्शनकारी
आंदोलन कर रहे आदिवासियों ने दो टूक चेतावनी दे दी है। उनका कहना है कि अगर इस बार उनकी समस्याओं का पक्का समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और उग्र होगा।
वे कलेक्टर से सीधे मिलकर ज्ञापन सौंपने पर अड़े हुए हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक कोई ठोस भरोसा नहीं मिलेगा, वे यहाँ से हिलने वाले नहीं हैं। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है। शहर में हलचल बनी हुई है और हर किसी की नजर इस प्रदर्शन के नतीजों पर टिकी है।



