छत्तीसगढ़ में अल-नीनो के कारण सूखे का खतरा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने की समीक्षा

टीआरपी। अल-नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष छत्तीसगढ़ में कमजोर मानसून और सूखे की आशंका गहरा गई है, जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों को संकट से बचाने के लिए युद्ध स्तर पर व्यापक रणनीति तैयार की है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने राज्य की मुस्तैदी और आकस्मिक कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी साझा की।
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छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों के लिए यह खबर बेहद संवेदनशील है क्योंकि राज्य में इस साल मानसून की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। यदि समय रहते कम अवधि की फसलों और बीज सुरक्षा पर काम नहीं किया गया, तो खरीफ सीजन पूरी तरह प्रभावित हो सकता है; यही वजह है कि सरकार धान के बदले दलहन-तिलहन को बढ़ावा देकर किसानों के आर्थिक नुकसान को न्यूनतम करने की कोशिश में जुट गई है।

अल-नीनो से निपटने की आकस्मिक योजना

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बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि राहुल देव, और संचालक अनुसंधान डॉ. विवेक त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि सूबे में 22 जून 2026 तक औसत वर्षा महज 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। राज्य में इस साल 48.69 लाख हेक्टेयर में खरीफ बोनी का लक्ष्य है, लेकिन सूखे के हालात के चलते अभी तक केवल 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है।

इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि विभाग अब कम अवधि वाली धान की किस्मों के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के वितरण पर जोर दे रहा है। ऊंचे ढलान वाली (उच्चहन) जमीनों पर अंतरवर्तीय फसल प्रणाली अपनाने की सलाह दी जा रही है। इसके साथ ही, फसल नुकसान की समय पर भरपाई के लिए बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर विशेष बीमा प्लान को प्रभावी बनाया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अनुसंधान विभाग ने भी अल-नीनो को ध्यान में रखकर आकस्मिक कार्ययोजना तैयार कर ली है।

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मानसून की भारी कमी: 22 जून तक केवल 30.8 मिमी बारिश हुई, जो कि 10 साल के औसत से 58.3 मिमी कम है।

बोनी की धीमी रफ्तार: कुल 48.69 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले अब तक सिर्फ 2 प्रतिशत रकबे में बोनी संभव हो सकी है।

प्रमाणित बीज का लक्ष्य: राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है।

सूखा प्रभावित जिलों को राहत: संकट का सामना कर रहे 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल किसानों को बांटा जा चुका है।

सरकार के इस त्वरित रुख के बाद आने वाले दिनों में सोसायटियों के माध्यम से कम पानी में तैयार होने वाले बीजों और रासायनिक के साथ-साथ नैनो उर्वरकों का वितरण तेज किया जाएगा। कृषि विभाग के मैदानी अधिकारी लगातार गांवों का दौरा कर किसानों को जागरूक करेंगे। यदि मानसून की बेरुखी आगे भी जारी रहती है, तो सरकार प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष राहत पैकेज और सिंचाई के वैकल्पिक संसाधनों की घोषणा कर सकती है।

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