टीआरपी। छत्तीसगढ़ में इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण एडवायजरी जारी की है। विभाग ने कम जलधारण क्षमता वाली जमीनों पर धान के बदले कम पानी में उगने वाली दलहन और तिलहन फसलों को अपनाने की सलाह दी है।
मौसम के बदलते मिजाज और कम बारिश की स्थिति में यह फैसला छत्तीसगढ़ के किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाएगा। धान पर निर्भरता कम करके और वैकल्पिक फसलों को अपनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सूखा प्रभावित होने से सुरक्षित रखा जा सकता है।
वैकल्पिक फसलें और सरकारी मदद
राज्य शासन द्वारा प्रदेश में फसल विविधीकरण को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत जो भी किसान अपलैंड (ऊपरी) क्षेत्रों में धान के बदले दलहन और तिलहन की खेती करेंगे, उन्हें सरकार की तरफ से 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इन फसलों में मुख्य रूप से अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी और रागी शामिल हैं, जो कम पानी में भी बेहतरीन पैदावार देती हैं। इसके साथ ही इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित की जाएगी।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, दलहनी फसलें न केवल कम लागत में तैयार होती हैं, बल्कि हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ाती हैं। इससे आने वाले सीजन की फसलों को फायदा होता है। इसके अतिरिक्त, विभाग ने मध्यम भूमि वाले किसानों को जल की अनिश्चितता से निपटने के लिए कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्मों का चयन करने का परामर्श दिया है।
प्रोत्साहन राशि: धान के बदले दलहन-तिलहन लगाने पर ₹15,000 प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता।
सुरक्षित खरीदी: उत्पादित फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के तहत समर्थन मूल्य पर की जाएगी।
मौसम की चुनौती: इस वर्ष प्रदेश में एल-नीनो के प्रभाव के चलते कम वर्षा की संभावना जताई गई है।
कृषि विभाग की इस वैज्ञानिक सलाह और सरकारी प्रोत्साहन के बाद उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ के लाखों किसान पारंपरिक खेती के बजाय फसल विविधीकरण को अपनाएंगे, जिससे संभावित सूखे के असर को कम कर ग्रामीण आय को स्थिर रखा जा सकेगा।



