टीआरपी। छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा का दंश झेल चुके एक पीड़ित परिवार ने पुनर्वास नीति का लाभ न मिलने पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस विभाग से हरी झंडी मिलने के बावजूद राजनांदगांव जिला प्रशासन के स्तर पर उनका मामला पिछले कई महीनों से अटका हुआ है।
यह मामला छत्तीसगढ़ की महत्वाकांक्षी नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 के जमीनी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बस्तर और राजनांदगांव जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के सैकड़ों परिवारों का भविष्य इन नीतियों पर टिका है, ऐसे में प्रशासनिक देरी पीड़ितों के जख्मों को और हरा कर देती है।
पुनर्वास नीति और फाइलों में अटका न्याय
पीड़ित परिवार के सदस्य धीरेंद्र कुमार साहू ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे अपने आवेदन में बताया कि उन्होंने 14 मई 2026 को पुनर्वास नीति के तहत लाभ पाने के लिए आधिकारिक तौर पर आवेदन किया था। इस मामले में पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव द्वारा पूरी जांच कर अपनी अनुशंसा सौंप दी गई थी। इसके बाद पुलिस महानिरीक्षक राजनांदगांव रेंज ने भी 27 मई 2026 को जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया था।
सभी सुरक्षा एजेंसियों से क्लीयरेंस मिलने के बाद भी जिला प्रशासन स्तर पर फाइल लंबित होने से परिवार में गहरी नाराजगी है। पीड़ित परिवार ने तीखा सवाल उठाया है कि नक्सल हिंसा में अपनों को खोने के बाद भी क्या पीड़ितों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे? धीरेंद्र कुमार साहू ने डॉ. रमन सिंह से इस संवेदनशील मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और राजनांदगांव कलेक्टर को शीघ्र निर्णय लेने के निर्देश देने की मांग की है।
नीति का नाम: राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025।
आवेदन की तारीख: पीड़ित परिवार द्वारा 14 मई 2026 को राहत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
आईजी रेंज का पत्र: पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय से 27 मई 2026 को जिला प्रशासन को अंतिम कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया गया था।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद है कि राजनांदगांव जिला प्रशासन इस लंबित प्रकरण पर त्वरित कार्रवाई करेगा। पीड़ित परिवार ने स्पष्ट किया है कि यदि उन्हें जल्द ही उनका कानूनी अधिकार और सम्मान नहीं मिला, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से राजधानी रायपुर की सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए मजबूर होंगे।





