भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अटल आवास योजना के नाम पर फ्लैट दिलाने के बहाने करोड़ों का चूना लगाने वाली जालसाज प्रमिला तिवारी के फर्जीवाड़े का जाल उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा निकला है। टीटी नगर थाना पुलिस की गिरफ्त में आई प्रमिला और उसके साथियों के नेटवर्क को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह केवल सस्ते मकान दिलाने तक सीमित नहीं था, बल्कि मध्य प्रदेश के भोपाल, रीवा, जबलपुर, बैतूल और सतना जैसे बड़े शहरों के बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर भी लाखों रुपये की ठगी कर चुका है।
आईएफएस अफसर और मंत्री के फर्जी दस्तखत वाले जॉइनिंग लेटर बांटे
यह गिरोह इतना शातिर था कि वन विभाग, भारतीय रेलवे, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पीडब्ल्यूडी, एम्स और नगर निगम जैसे प्रतिष्ठित विभागों में नौकरी लगाने का झांसा देता था। युवाओं का भरोसा जीतने के लिए ये लोग बकायदा फर्जी नियुक्ति पत्र यानी जॉइनिंग लेटर तैयार करते थे। ठगों ने भोपाल के नवीन सौंधिया को एक फर्जी लेटर थमाया जिसमें उसे वन विभाग का बड़ा अफसर दिखाया गया। वहीं रीवा के राकेश दुबे की बेटी से पांच लाख रुपये वसूलकर लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी मंत्री के फर्जी दस्तखत वाला लेटर सौंप दिया गया। हद तो तब हो गई जब करोंद के रहने वाले राहुल और नवीन को नगर निगम में नौकरी का झांसा देकर उनसे पैसे भी लिए गए और मामले को असली दिखाने के लिए उनसे डेढ़ महीने तक बकायदा शहर में फील्ड सर्वे का काम भी कराया गया।
सरकारी दफ्तरों के बाहर बुलाकर जीतते थे भरोसा
आरोपियों के पास युवाओं के नंबर और उनकी पढ़ाई-लिखाई की पूरी जानकारी पहले से होती थी। गिरोह के सदस्य युवाओं को सीधे सरकारी दफ्तरों के बाहर मिलने के लिए बुलाते थे ताकि कोई शक न करे। वहां पहले से ही गिरोह के कुछ और लड़के मौजूद रहते थे जो खुद को उसी दफ्तर का कर्मचारी बताते थे और कहते थे कि प्रमिला मैडम ने ही हमारी नौकरी लगवाई है। आपको बता दें कि प्रमिला को 18 जून को कोटरा सुल्तानाबाद के प्रतीक सोनी की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया था, जिनसे फ्लैट के नाम पर 1.80 लाख रुपये की एडवांस ठगी की गई थी। पुलिस अब इस गिरोह के बाकी फरार सदस्यों की तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही है।



