टीआरपी डेस्क। देश की राजधानी दिल्ली को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए दिल्ली सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी ईवी पॉलिसी 2.0 के ड्राफ्ट प्रस्ताव में कहा गया है कि अप्रैल 2028 से दिल्ली में नए पेट्रोल टू-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। मौजूदा ईवी पॉलिसी जल्द ही खत्म होने वाली है, जिसके बाद इस नई नीति को लागू करने की तैयारी है। आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने वाले कुल वाहनों में लगभग 67 फीसदी हिस्सेदारी सिर्फ टू-व्हीलर्स की है। यही वजह है कि सरकार प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए इस सेगमेंट पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है।
इंडस्ट्री ने खोला मोर्चा, कहा- कोयले से बनने वाली बिजली और महंगी बैटरी पर बढ़ेगी निर्भरता
सरकार के इस कड़े प्रस्ताव के सामने आते ही ऑटोमोबाइल क्षेत्र की बड़ी कंपनियों और एक्सपर्ट्स ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। इंडस्ट्री का तर्क है कि आज भी आम और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए पेट्रोल से चलने वाले टू-व्हीलर ही सबसे सस्ता और भरोसेमंद साधन हैं। इसके अलावा जानकारों ने चिंता जताई है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों में लगने वाले बैटरी सेल और जरूरी कीमती सामान के लिए भारत को दूसरे देशों से आयात यानी इम्पोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता है। साथ ही ईवी को चार्ज करने के लिए जो बिजली चाहिए, वह भी अभी ज्यादातर कोयले से ही बन रही है। ऐसे में पर्यावरण को कितना फायदा होगा, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
सियाम ने दी चेतावनी, सरकार से पुराने वाहनों को हटाने की मांग की
वाहनों के बड़े संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स यानी सियाम ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है। सियाम का कहना है कि पेट्रोल वाहनों पर अचानक पूरी तरह बैन लगाने से मार्केट का संतुलन बिगड़ जाएगा और ग्राहकों के पास विकल्प खत्म हो जाएंगे। संगठन के मुताबिक आजकल आने वाले नए बीएस 6.2 इंजन वाले टू-व्हीलर वैसे ही बहुत कम प्रदूषण फैलाते हैं। इसलिए सरकार को नई गाड़ियों पर रोक लगाने के बजाय उन पुरानी और खटारा गाड़ियों को सड़कों से हटाने पर ध्यान देना चाहिए जो असली प्रदूषण की वजह हैं।
सरकार का तर्क और कानूनी आधार
दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने इस ड्राफ्ट पॉलिसी को तैयार करते समय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21 – जीने का अधिकार) का हवाला दिया है, जिसके तहत हर नागरिक को साफ हवा और प्रदूषण मुक्त माहौल मिलने का अधिकार है। दिल्ली में जितने भी कुल रजिस्टर्ड वाहन हैं, उनमें से अकेले 67 प्रतिशत हिस्सेदारी टू-व्हीलर्स की है। दिल्ली के कुल व्हीकुलर एमिशन (वाहनों से निकलने वाले धुएं) में इनका बड़ा हाथ है, इसलिए सरकार इस मोर्चे पर सख्त कदम उठा रही है।
सब्सिडी और स्क्रैपेज का गणित
पहले साल बंपर छूट: 2.25 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक के ई-टू-व्हीलर खरीदने पर पहले साल 10,000 रुपये प्रति kWh के हिसाब से अधिकतम 30,000 रुपये की सीधी सरकारी छूट (इंसेंटिव) मिलेगी। दूसरे साल यह छूट घटकर अधिकतम 20,000 रुपये और तीसरे साल सिर्फ 10,000 रुपये रह जाएगी। सरकार का सोचना है कि शुरुआत में भारी छूट देकर लोगों को ईवी की तरफ खींचा जाएगा। अगर कोई ग्राहक दिल्ली में रजिस्टर्ड अपनी पुरानी पेट्रोल बाइक या स्कूटर को मान्यता प्राप्त कबाड़ केंद्र (Scrapping Facility) में देता है और नई ईवी खरीदता है, तो उसे 10,000 रुपये का अलग से बोनस मिलेगा। इसके साथ ही, मार्च 2030 तक सभी ईवी कारों और टू-व्हीलर्स को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस से 100% छूट देने का भी प्रस्ताव है।



