सक्ती । छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां बेहतर मजदूरी के लालच में हरियाणा गए दर्जनों श्रमिक एक ईंट भट्ठे में फंस गए हैं। पीड़ित मजदूरों ने जिला प्रशासन से उन्हें सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है।

मिली जानकारी के मुताबिक, सक्ती जिले के परसाडीह, बाराद्वार और कारी भावर गांव के करीब 35 से 40 मजदूर हरियाणा के हिसार जिले के हांसी थाना क्षेत्र स्थित सुल्तानपुर के एक ईंट भट्ठे में काम करने गए थे। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें वहां बंधक बनाकर रखा गया है और घर लौटने में परेशानी हो रही है।

पीड़ितों का कहना है कि हरियाणा का श्रम विभाग जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र की मांग कर रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मजदूरों का यह भी आरोप है कि लेबर ठेकेदार ऊंची मजदूरी का लालच देकर उन्हें बाहर ले जाते हैं और बाद में उनकी मजदूरी का बड़ा हिस्सा पहले ही वसूल लेते हैं।

मजदूरों ने वीडियो भेजकर लगाई गुहार

ईंट भट्ठे में फंसे मजदूरों ने वीडियो भेजकर हालात बयां की है। इनमें मजदूर सपरिवार एक स्थान पर खड़े हुए नजर आ रहे हैं। इनमें से दो महिलाओं ने बताया कि उनसे काम कराने के बावजूद मजदूरी नहीं दी जा रही है। वे वापस आना चाहते हैं, मगर पैसे नहीं मिलने के चलते वापस लौटने में दिक्कत हो रही है। मजदूरों ने बताया कि वे अपना पूरा सामान बांध कर जाने की तैयारी में हैं, मगर ठेकेदार केवल आधी मजदूरी दे रहा है और उन्हें जाने भी नहीं दे रहा है, विरोध करने पर वह मारपीट की धमकी दे रहा है।

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स्थानीय श्रम अधिकारी नहीं कर रहे मदद

इन महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनकी शिकायत पर जो श्रम अधिकारी यहां पर आए हैं, वे उनकी कुछ भी नहीं सुन रहे हैं। वे सिर्फ ठेकेदारों का पक्ष ले रहे हैं। मजदूरों ने बताया कि यहां वे अंधेरे में गुजारा कर रहे हैं और उन्हें बिजली की सुविधा भी नहीं दी गई है। वे काफी परेशान हैं, और घर लौटना चाहते हैं। 

इन मजदूरों ने सक्ती  जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी मदद करते हुए उन्हें वापस लाया जाए। 

गौर करने वाली बात यह है कि हरियाणा में फंसे इन मजदूरों का मामला वीडियो समेत मीडिया तक पहुंच गया है, मगर इसकी खबर सक्ती जिले के श्रम विभाग को नहीं है। जिले की श्रम अधिकारी मंजुलता कुर्रे ने टीआरपी न्यूज को बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने हमसे ही पूरी जानकारी मंगाई और विधिवत कार्रवाई की बात कही है। 

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श्रम अधिकारी मंजुलता ने बातचीत में कहा कि मजदूर ठेकेदारों से एडवांस में रकम लेने के बाद काम करने जाते हैं, बाद में वे रकम के बदले काम पूरा किए बिना ही लौटने की बात कहते हैं, तब विवाद होता है। उन्हें काम पूरा करके ही लौटना चाहिए। 

वैसे बता दें कि मजदूरों को एडवांस देकर काम के लिए लेकर जाना भी बंधुआ मजदूरी कानून के अंतर्गत आता है और ऐसा करना ही गैरकानूनी है, मगर लगता है कि श्रम अधिकारी को इस कानून की पूरी जानकारी ही नहीं है।

बंधुआ मजदूरी कानून का पालन नहीं करता श्रम विभाग 

देश भर में बंधुआ मजदूरी के खिलाफ कैंपेन चलाने वाले संगठन NCCEBL के संयोजक निर्मल गोराना ने टीआरपी न्यूज से बातचीत में बताया कि इस तरह के मामलों में श्रम विभाग अक्सर टीम लेकर संबंधित स्थल पर पहुंचता है और मजदूरों को उनका मेहनताना दिलाकर वापस लेकर आ जाता है। श्रम अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल इतनी ही नहीं होती। इस तरह का मामला बंधुआ मजदूरी के तहत आता है और नियम के मुताबिक श्रम विभाग को बंधुआ कानून के तहत प्रकरण बनाकर  इन मजदूरों को संबंधित जिला प्रशासन से मुक्ति प्रमाण पत्र जारी कराना चाहिए। इसके साथ ही मजदूर जिन जिलों के रहने वाले हैं, वहां के प्रशासन द्वारा नियम के तहत मजदूरों को मुआवजा देते हुए उनका पुनर्वास करना चाहिए। मगर अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता। अफसर मजदूरों को छुड़ाकर वापस ले आते हैं और अपनी पीठ थपथपाते हैं। 

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बहरहाल देखना यह है कि हरियाणा के ईंट भट्ठे में फंसे मजदूरों की श्रम विभाग किस तरह मदद करता है और कानून के मुताबिक उन्हें न्याय दिला पाता है या नहीं।