टीआरपी डेस्क। राजनीतिक गलियारों में इन दिनों मोदी कैबिनेट के आगामी विस्तार को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर, अगर हम पिछले तीन कार्यकाल के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें, तो एक बात साफ है कि पीएम मोदी जब भी कैबिनेट में फेरबदल करते हैं, तो बड़े-बड़ों की कुर्सियां हिल जाती हैं।

जब रविशंकर, जावड़ेकर और हर्षवर्धन जैसे दिग्गजों की हुई छुट्टी

दरअसल, मोदी सरकार के अब तक के सफर में कुल चार बड़े फेरबदल हुए हैं, लेकिन साल 2021 का फेरबदल सबसे ज्यादा चौंकाने वाला था।

  • कोरोना काल के बाद बड़ा एक्शन: महामारी की दूसरी लहर के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से इस्तीफा ले लिया गया था।
  • दिग्गजों की विदाई: आईटी और कानून मंत्रालय संभाल रहे रविशंकर प्रसाद और पर्यावरण व सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जैसे कद्दावर नेताओं की अचानक छुट्टी कर दी गई थी।

इनकी चमकी किस्मत

इसी फेरबदल में ज्योतिरादित्य सिंधिया को नागरिक उड्डयन और अश्विनी वैष्णव को रेल मंत्रालय जैसी भारी-भरकम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। छत्तीसगढ़ की रेणुका सिंह सरुता को भी राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली थी, जिन्होंने बाद में विधानसभा चुनाव जीतने पर इस्तीफा दे दिया।

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पहले कार्यकाल के वो 3 बड़े फेरबदल, जिसने बदली सरकार की दिशा

साल 2014 से 2019 के बीच पीएम मोदी ने तीन बार अपनी टीम में बदलाव किया।

  • 9 नवंबर 2014 (पहला विस्तार): सरकार बनने के 6 महीने बाद ही 21 नए चेहरों को एंट्री मिली। मनोहर पर्रिकर को रक्षा और सुरेश प्रभु को रेल मंत्रालय दिया गया।
  • 5 जुलाई 2016 (दूसरा फेरबदल): स्मृति ईरानी से हाई-प्रोफाइल मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय लेकर उन्हें कपड़ा मंत्रालय भेज दिया गया और प्रकाश जावड़ेकर का प्रमोशन हुआ। इस दौरान 5 मंत्रियों को बाहर निकाला गया।
  • 3 सितंबर 2017 (तीसरा फेरबदल): 2019 के चुनाव से ठीक पहले निर्मला सीतारमण को देश का रक्षा मंत्री बनाकर सबको चौंका दिया गया, जबकि पीयूष गोयल को रेल मंत्रालय की कमान मिली।

दल-बदलू नेताओं पर भी मेहरबान रही सरकार

बीजेपी ने दूसरी पार्टियों से आए कद्दावर नेताओं को कैबिनेट में पूरा सम्मान दिया है। कांग्रेस से आए ज्योतिरादित्य सिंधिया और हरियाणा के चौधरी बीरेंद्र सिंह इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। वहीं, शिवसेना छोड़कर आए सुरेश प्रभु को सीधे देश का रेल मंत्री बना दिया गया था।

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अब चूंकि साल 2024 में शुरू हुए तीसरे कार्यकाल को भी अच्छा-खासा समय बीत चुका है और अब तक कोई बड़ा फेरबदल नहीं हुआ है, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही कुछ नए चेहरों की लॉटरी लग सकती है और कुछ पुराने नेताओं की छुट्टी होना तय है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।