रायपुर। रायपुर के नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को विस्थापित ग्रामीण राजधानी की सड़कों पर उतर आए। पहले उन्होंने मंत्री ओपी चौधरी के सरकारी बंगले का घेराव किया, फिर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच कर दिया। उनके साथ कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। स्थिति को देखते हुए CM हाउस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

इससे पहले ग्रामीण रायपुर कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री आवास के बाहर ही भोजन किया। पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की तो ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा, घर तो पहले ही तोड़ दिए गए, अब खाना भी नहीं खाने दिया जा रहा।

ग्रामीणों की तीन प्रमुख मांगें

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन के सामने साफ कहा कि उन्हें उनकी जमीन वापस दी जाए, तोड़े गए मकानों का उचित मुआवजा मिले और आंदोलन के दौरान दर्ज की गई एफआईआर वापस ली जाए।

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कलेक्टर ने बातचीत के लिए 10 महिलाओं को बुलाया। प्रतिनिधिमंडल में शामिल रानी साहू ने बताया कि उन्होंने सभी मांगें प्रशासन के सामने रखीं। कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि उनकी बात सरकार तक पहुंचाई जाएगी।

5 दिन का समय, फिर आंदोलन की चेतावनी

आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया, लेकिन सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि तय समय में कोई सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन फिर तेज किया जाएगा।

रायपुर ग्रामीण कांग्रेस के जिला अध्यक्ष पप्पू बंजारे ने कहा कि अगर सरकार ने मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो मामला राज्यपाल के सामने उठाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर प्रदेशव्यापी बंद की घोषणा भी की जा सकती है।

वहीं, पूर्व विधायक अनीता योगेंद्र शर्मा ने कहा कि आगे की रणनीति पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद तय की जाएगी और फिलहाल सरकार के जवाब का इंतजार किया जाएगा।

3 दिन पहले 80 घरों पर चली थी कार्रवाई

गौरतलब है कि तीन दिन पहले नकटी गांव में प्रशासन ने करीब 80 मकानों पर बुलडोजर चलाया था। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों को EWS आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, हालांकि सभी परिवारों को अब तक मकान नहीं मिला है। दूसरी ओर, हाउसिंग बोर्ड का दावा है कि गांव के 77 लोगों ने करीब 15 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ था।

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