रायपुर। भिलाई नगर निगम के पार्षदों को हाईकोर्ट से बड़ी निराशा हाथ लगी है। कोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर राजीव पांडे को हटाने की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए गए फैसले मान्य नहीं होते हैं।

क्या था पूरा मामला

पार्षद संदीप निरंकारी के नेतृत्व में 32 पार्षदों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। पार्षदों का आरोप था कि निगम कमिश्नर ने वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर कई अनियमितताएं की हैं। इसी के चलते एक विशेष सत्र के दौरान दो-तिहाई से ज्यादा पार्षदों ने कमिश्नर को पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया था। पार्षदों का तर्क था कि बहुमत के आधार पर सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी।

नियमों की अनदेखी पड़ी भारी

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने बताया कि जिस बैठक में कमिश्नर को हटाने का प्रस्ताव पास हुआ, उसका एजेंडा सिर्फ बजट पर चर्चा करना था। पार्षदों को जो आधिकारिक नोटिस भेजा गया था, उसमें कमिश्नर को हटाने जैसा कोई मुद्दा शामिल ही नहीं था। राज्य सरकार ने इसे छत्तीसगढ़ नगर पालिका नियम 2016 का सीधा उल्लंघन बताया। इसी कानूनी चूक के कारण प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठे।

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अदालत ने क्या कहा

कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को सही माना। जस्टिस प्रसाद ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी संस्था को काम करने के लिए तय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि सिर्फ बहुमत होने भर से गलत तरीके से पास किया गया प्रस्ताव मान्य नहीं हो जाता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों के उल्लंघन के कारण इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए सरकार को कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।