पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर मची अंदरूनी खींचतान को शांत करने के लिए दिल्ली हाईकमान ने छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता और पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल को कमान सौंप दी है। सोमवार दोपहर तकरीबन 3 बजे भूपेश बघेल चंडीगढ़ पहुंच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वह अगले पांच दिनों तक पंजाब में ही डटे रहेंगे और रूठे हुए नेताओं को मनाने के साथ-साथ चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे।

रायपुर एयरपोर्ट से रवाना होने से पहले भूपेश बघेल ने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि पंजाब में चुनावी शंखनाद हो चुका है। कांग्रेस की ओर से कमेटियां बनाई जा चुकी हैं और यूथ कांग्रेस के चुनाव भी पूरे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के सभी सीनियर साथियों और कार्यकर्ताओं से मिलकर आने वाले चुनाव की रणनीति पर खुलकर चर्चा की जाएगी। हालांकि, जब उनसे गुटबाजी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है और सभी मिलकर चुनाव लड़ेंगे।

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चरणजीत सिंह चन्नी की नाराजगी दूर करना सबसे बड़ी चुनौती

दरअसल, कांग्रेस हाईकमान के लिए इस समय सबसे सिरदर्द पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं की नाराजगी बनी हुई है। चुनाव समिति के गठन के बाद से ही चन्नी गुट खुद को अलग-थलग महसूस कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ पहुंचते ही भूपेश बघेल सबसे पहले चरणजीत सिंह चन्नी और उनके करीबी वरिष्ठ नेताओं से बंद कमरे में मुलाकात करेंगे। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अन्य गुटों के नेताओं के साथ भी उनकी वन-टू-वन बैठकें तय हैं। एआईसीसी के पंजाब सह-प्रभारी हीना कावरे, रविंदर डलवी और सूरज ठाकुर भी चंडीगढ़ पहुंच रहे हैं, जो जमीनी फीडबैक इकट्ठा करेंगे।