टीआरपी डेस्क। बिलासपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में अब मौत के बाद अपनों को विदाई देना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। बेलगहना ब्लॉक के ग्राम ढोलमौहा सहित दर्जनों गांवों में रसूखदार लोगों ने शासकीय श्मशान घाटों और मुक्तिधाम की जमीनों को अपने खेतों में मिला लिया है। स्थिति इतनी खराब है कि शव ले जाने वाले सार्वजनिक रास्तों को भी दबंगों ने घेरकर बंद कर दिया है।

रास्ता बंद, मुक्तिधाम में बदल गया खेत

सोनपुरी और ढैंचा-नगोई क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि आस्था के इन केंद्रों पर कब्जे के बाद गांव में तनाव बढ़ गया है। कई जगहों पर तो श्मशान घाट की जमीन को ट्रैक्टर से जोतकर फसल उगा दी गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि रसूखदार लोगों ने न सिर्फ जमीन कब्जाई है, बल्कि वहां जाने के रास्ते तक ब्लॉक कर दिए हैं।

ग्राम ढोलमौहा की रहने वाली कुंद बाई कहती हैं, श्मशान घाट हमारे पूर्वजों की आखिरी निशानी है। अब किसी की मौत हो जाए, तो अंतिम संस्कार करने के लिए जगह नहीं बच रही है। रास्ता काट दिया गया है, हम कहां जाएं?

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तहसील कार्यालय में धूल फांक रही शिकायतें

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने 13 जून 2026 को तहसीलदार से शिकायत की थी। पंचायत से नोटिस भी जारी हुआ, लेकिन जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब स्थानीय महिलाओं और स्व-सहायता समूह ने इस अवैध काम का विरोध किया, तो दबंगों ने उन्हें खुलेआम गाली-गलौज और धमकी दी।

मदन कुंवर यादव का कहना है कि राजस्व विभाग का अमला सिर्फ कागजी खेल खेल रहा है। आरआई (RI) और पटवारी सीमांकन के लिए तारीख पर तारीख दे रहे हैं, लेकिन मौके पर कभी नहीं पहुंचते। अब ग्रामीणों के पास कलेक्टर दफ्तर आने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

कलेक्टर का सख्त रुख

तखतपुर और बिल्हा ब्लॉक के कई गांवों में भी यही हाल है। मुक्तिधाम जैसी संवेदनशील जगहों पर प्रशासन की सुस्ती को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है। मामला गंभीर होता देख अब बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाया है।

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कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा, श्मशान घाट और मुक्तिधाम की जमीनों पर अवैध कब्जे की शिकायतें बेहद गंभीर हैं। सभी SDM और तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तत्काल राजस्व टीम भेजकर सीमांकन सुनिश्चित करें। जहां भी अतिक्रमण है, उसे कड़ाई से हटाया जाएगा। शासकीय भूमि कब्जाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।