Medical professionals in protective gear monitoring health equipment inside a hospital ward
Health departments are issuing new advisories following the recent spike in infection cases.

Covid In India : कडप्पा जिले से एक बेहद डराने वाली और आंखें खोलने वाली खबर सामने आई है। यहां कोरोना संक्रमण के कारण एक 46 वर्षीय व्यक्ति की अचानक मौत हो गई। यह घटना इस बात का साफ संकेत है कि महामारी का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि मरीज को लगातार 4 दिनों तक एंटीबायोटिक दवाओं का हैवी डोज दिया गया था। इसके बावजूद मरीज के लक्षणों में कोई सुधार नहीं हुआ और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

चिकित्सकों के अनुसार यह एक बेहद संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से हवा के माध्यम से फैलती है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके मुंह से निकले बारीक कण हवा में तैरने लगते हैं। इसके बाद कम हवा वाले या बंद कमरों में ये कण कई घंटों तक बने रह सकते हैं। यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति इस दूषित हवा में सांस लेता है तो वह भी तुरंत इसकी चपेट में आ जाता है। यही वजह है कि अचानक कोरोना के नए मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह सतर्क हो गया है।

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इन शुरुआती और आपातकालीन लक्षणों पर रखें पैनी नजर

इस वायरस की चपेट में आने के 2 से 14 दिनों के भीतर शरीर में इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। शुरुआत में मरीजों को स्वाद और गंध का पता नहीं चलता है। इसके अलावा पेट खराब होना, सर्दी-जुकाम और सांस लेने में तकलीफ जैसी दिक्कतें आम हैं। हालांकि अगर छाती में लगातार तेज दर्द हो या होंठ और नाखूनों का रंग नीला पड़ने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। दरअसल ऐसी स्थिति में मरीज का ऑक्सीजन का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिरने लगता है।

बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी और व्यावहारिक तरीके

इस जानलेवा बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका समय पर टीका लगवाना ही है। खासकर 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को बूस्टर डोज जरूर लेनी चाहिए। इसके अलावा बीमार लोगों से उचित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है। अपने हाथों को समय-समय पर साबुन से अच्छे से साफ करें। भीड़भाड़ वाले संवेदनशील इलाकों में जाते समय मास्क का प्रयोग बिल्कुल न भूलें। घर के दरवाजों के हैंडल जैसी जगहों को नियमित रूप से साफ करते रहें।

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संक्रमित होने की स्थिति में क्या करें

अगर आपकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो बिना समय गंवाए डॉक्टर की सलाह लें। हालांकि खुद से कोई भी हैवी एंटीबायोटिक दवा लेने की गलती बिल्कुल न करें। गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में विशेष जीवन रक्षक प्रणालियों की व्यवस्था की जाती है। आने वाले समय में स्वास्थ्य मंत्रालय नए दिशा-निर्देश भी जारी कर सकता है। नतीजतन सभी नागरिकों को सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा ताकि इस संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।