An aerial view of the main manufacturing facility of Hindustan Aeronautics Limited in Bengaluru
Bengaluru based Hindustan Aeronautics Limited is the cornerstone of India's aerospace sector.

टीआरपी डेस्क। First Defence Company India:भारतीय रक्षा क्षेत्र में आज 16 सरकारी रक्षा उपक्रम और 400 से अधिक निजी कंपनियां काम कर रही हैं। इसके अलावा हजारों छोटे उद्योग भी हमारी सेनाओं को कल-पुर्जे सप्लाई करने के काम में जुटे हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि देश की सबसे पहली रक्षा कंपनी कौन-सी है। इस गौरवशाली सफर की शुरुआत आज से करीब 85 साल पहले एक हवाई यात्रा के दौरान हुई थी। आज यह कंपनी देश की सुरक्षा व्यवस्था की सबसे मजबूत रीढ़ मानी जाती है।

एक अनजानी मुलाकात और मैसूर के महाराजा का बड़ा दान

वर्ष 1939 में मशहूर उद्योगपति सेठ वालचंद हीराचंद की मुलाकात एक विमान यात्रा के दौरान विदेशी कंपनी के डायरेक्टर विलियम डगलस पॉली से हुई। इसी अचानक हुई मुलाकात ने देश में विमान निर्माण की नींव रखी। इसके बाद 23 दिसंबर 1940 को बेंगलुरु में ‘हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड’ की स्थापना हुई। जब मैसूर के महाराजा जयाचामाराजेंद्र वाडियार को इस योजना का पता चला, तो उन्होंने तुरंत 700 एकड़ की बेशकीमती जमीन दान में दे दी। इसके साथ ही उन्होंने कंपनी में 25 लाख रुपये का बड़ा निवेश भी किया।

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जब सरकार ने अपने हाथों में ली कमान

शुरुआती दौर में मैसूर के तत्कालीन दीवान सर मिर्जा इस्माइल ने भी इस औद्योगिक पहल का पूरा समर्थन किया। हालांकि मार्च 1941 में भारत सरकार इस कंपनी की मुख्य शेयरहोल्डर बन गई। इसके बाद वर्ष 1942 में प्रशासनिक कारणों से इसका पूरा प्रबंधन सरकार ने अपने हाथों में ले लिया। जनवरी 1951 आते-आते इस पूरी कंपनी को रक्षा मंत्रालय के सीधे नियंत्रण में सौंप दिया गया। आज हम इस ऐतिहासिक उपक्रम को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नाम से जानते हैं।

विमानों से लेकर अंतरिक्ष मिशन तक फैला है कारोबार

आज यह महारत्न कंपनी केवल लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर ही नहीं बनाती है। इसके अलावा वर्ष 1988 में बने इसके विशेष एयरोस्पेस डिवीजन के जरिए यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के बड़े अभियानों में भी सहयोग कर रही है। अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले रॉकेट और उपग्रहों के जटिल ढांचे इसी फैक्ट्री में तैयार किए जाते हैं। यही वजह है कि शेयर बाजार में भी इस भारत की पहली रक्षा कंपनी का दबदबा लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

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बाजार में भारी साख और आगे का भविष्य

वर्तमान समय में इस सरकारी कंपनी की कुल मार्केट कैपिटल 3.01 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। मार्च 2018 में शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद इसके एक शेयर की कीमत 4,506.55 रुपये तक जा पहुंची है। रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में यह कंपनी अत्याधुनिक स्वदेशी लड़ाकू विमानों के नए संस्करण बनाने पर काम कर रही है। नतीजतन वैश्विक रक्षा निर्यात के मामले में भी भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

भारत की पहली और सबसे पुरानी रक्षा कंपनी का नाम क्या है?


भारत की पहली और सबसे पुरानी रक्षा कंपनी का नाम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड है।

इस कंपनी की स्थापना में मैसूर के महाराजा का क्या योगदान था?


महाराजा ने कंपनी के लिए 700 एकड़ जमीन दान में दी और 25 लाख रुपये का शुरुआती निवेश किया।

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हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को रक्षा मंत्रालय के अधीन कब किया गया?


इस कंपनी को जनवरी 1951 में भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के सीधे नियंत्रण में लाया गया था।

क्या यह रक्षा कंपनी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भी मदद करती है?


हां, इसका विशेष एयरोस्पेस डिवीजन इसरो के लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट के लिए जरूरी ढांचे बनाता है।

शेयर बाजार में वर्तमान में इस कंपनी की मार्केट कैपिटल कितनी है?


शेयर बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस कंपनी की कुल मार्केट कैपिटल 3.01 लाख करोड़ रुपये है।