रायपुर। रायपुर विकास प्राधिकरण में ईडब्ल्यूएस फ्लैट आवंटन में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। कमल विहार सेक्टर-1 में एक बुजुर्ग महिला से 4.61 लाख रुपये जमा कराने के बाद भी उनका फ्लैट किसी दूसरे को बेच दिया गया। मामले में आरडीए के सीईओ ने जांच के आदेश दिए हैं।
रायपुर की अनीता श्रीवास्तव, 64 वर्ष, किराए के घर में रहती हैं। उन्होंने आरडीए के कमल विहार सेक्टर-1 में 2 बीएचके ईडब्ल्यूएस फ्लैट बुक कराया था। महिला ने पंजीयन के लिए 20 हजार रुपये जमा कराये। फिर 28 मई 2025 को 4 लाख 61 हजार रुपये आरडीए को दिया और दोनों बार की पूरी रसीद भी ली।
कुछ महीने बाद जब अनीता रजिस्ट्री की जानकारी लेने आरडीए दफ्तर गईं तो पता चला कि उनका फ्लैट अब किसी और के नाम है। दो साल से घर का सपना देख रही अनीता को झटका लगा है।
बेटे ने सीईओ से की शिकायत
अनीता के बेटे गौरव श्रीवास्तव ने आरडीए के सीईओ अवनीश शरण को इस मामले की लिखित शिकायत की है।
गौरव का आरोप है कि मां की बीमारी और कमजोरी का फायदा उठाकर धोखा किया गया। उन्होंने फ्लैट के लिए पैसे कर्ज लेकर जमा किए गए थे। परिवार ने मामले में दलालों की मिलीभगत का शक भी जताया है।
शिकायत में कहा गया है कि आरडीए के कुछ कर्मचारी मिलकर एक ही फ्लैट को गुपचुप दूसरे को बेच रहे हैं।
सीईओ ने जांच की बात कही
सीईओ अवनीश शरण ने मामले को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर सख्त कार्रवाई होगी। आगे किसी हितग्राही के साथ ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
आरडीए का दावा है कि वो सस्ती दरों पर घर देता है, लेकिन इस तरह की घटना से आम लोगों का भरोसा टूट रहा है। गरीब और बुजुर्ग जो जिंदगी भर की कमाई से या कर्ज लेकर घर खरीदते हैं, उन्हें ऐसे धोखे से सबसे ज्यादा नुकसान होता है। अब जांच के बाद कार्रवाई से ही लोगों का भरोसा वापस लौट सकता है।


