हाईकोर्ट भवन के सामने न्याय का हथौड़ा और सरकारी भर्ती परीक्षा रद्द होने की खबर का दृश्यांकन
हाईकोर्ट ने सहायक मत्स्य अधिकारी भर्ती परीक्षा 2025 के परिणाम निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।

टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना का अधिकार कानून को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि किसी भी लोक सूचना अधिकारी पर सीधे जुर्माना नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए राज्य सूचना आयोग को कानून के तहत अलग से नोटिस देना होगा। इसके अलावा अधिकारी को अपनी बात रखने का पूरा और उचित अवसर भी देना अनिवार्य होगा। बिलासपुर हाईकोर्ट के इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।

अपील की कार्यवाही का नोटिस अंतिम नहीं

जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने एक लोक सूचना अधिकारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। दरअसल राज्य सूचना आयोग ने एक मामले में अधिकारी पर जुर्माना लगा दिया था। इसके साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी की गई थी। आयोग का मानना था कि दूसरी अपील के दौरान जारी किया गया नोटिस ही अंतिम है। लेकिन हाईकोर्ट ने आयोग के इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अपील का नोटिस और जुर्माने का नोटिस दोनों अलग-अलग बातें हैं।

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कौशल विकास योजना से जुड़ा था पूरा मामला

यह पूरा विवाद एक आरटीआई आवेदन से शुरू हुआ था। एक आवेदक ने कौशल विकास योजना के तहत खरीदी गई अनुपयोगी सामग्री की नीलामी की जानकारी मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी ने तब जवाब दिया था कि मांगी गई सूचना बहुत बड़ी है और स्पष्ट नहीं है। हालांकि इसके बाद प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 15 दिनों के भीतर मुफ्त जानकारी देने का आदेश दिया था। इसके बावजूद आवेदक ने राज्य सूचना आयोग में दूसरी अपील दायर कर दी। नतीजतन आयोग ने सीधे अधिकारी पर जुर्माना ठोक दिया।

हाईकोर्ट ने की कानून की सटीक व्याख्या

याचिकाकर्ता अधिकारी के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि जुर्माना लगाने से पहले कानून की धारा 20(1) के तहत कोई अलग नोटिस नहीं मिला। हाईकोर्ट ने इस दलील को सही माना। कोर्ट ने कहा कि यदि कानून किसी काम के लिए विशेष प्रक्रिया तय करता है, तो सरकारी संस्थाओं को उसका पूरी तरह पालन करना चाहिए। यही वजह है कि हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग द्वारा 6 सितंबर 2022 को जारी जुर्माना लगाने का पुराना आदेश पूरी तरह रद्द कर दिया। इस आरटीआई एक्ट हाईकोर्ट फैसला के बाद अब आयोग को अपनी कार्यप्रणाली बदलनी होगी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

बिलासपुर हाईकोर्ट ने आरटीआई को लेकर क्या बड़ा फैसला दिया है?

हाईकोर्ट ने कहा है कि लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले धारा 20(1) के तहत अलग से नोटिस देना अनिवार्य है।

क्या सूचना आयोग सीधे किसी अधिकारी पर जुर्माना लगा सकता है?

नहीं, हाईकोर्ट के नए आदेश के अनुसार आयोग अपील की सुनवाई के दौरान जारी नोटिस के आधार पर सीधे जुर्माना नहीं लगा सकता।

यह पूरा मामला किस विभाग की जानकारी से जुड़ा हुआ था?

यह मामला कौशल विकास योजना के तहत खरीदी गई अनुपयोगी सामग्री की नीलामी और निस्तारण की जानकारी से जुड़ा था।

हाईकोर्ट ने किस तारीख के पुराने आदेश को रद्द कर दिया है?

हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग द्वारा 6 सितंबर 2022 को पारित किए गए जुर्माने के आदेश को रद्द किया है।

इस फैसले से सरकारी अधिकारियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

इससे अधिकारियों को सुरक्षा मिलेगी और बिना उनका पक्ष सुने या बिना अलग नोटिस दिए उन पर कोई आर्थिक दंड नहीं लगेगा।

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