Chhattisgarh Naglok: आधुनिक युग में नागलोक जैसी बातें किसी कहानी का हिस्सा लगती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में यह सच्चाई के बेहद करीब है। इस पूरे क्षेत्र को नागलोक के नाम से जाना जाता है। जशपुर देशभर में एक ऐसी अनोखी जगह है, जहां कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांपों का भारी जमावड़ा है। यहाँ की फिज़ाओं में खतरे का अहसास हमेशा बना रहता है।
क्यों कहा जाता है इसे नागलोक?
जशपुर का वातावरण सांपों के रहने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। गर्मियों में जब जमीन तपती है, तो सांप अपने बिलों से बाहर आ जाते हैं। वहीं, बारिश के मौसम में बिलों में पानी भरने के कारण वे खुले में विचरण करने लगते हैं। यही वजह है कि साल के इन महीनों में यहाँ का जनजीवन काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इन जहरीले जीवों के डर के कारण हर साल यहां सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है।
सांपों की 70 से अधिक प्रजातियां
जशपुर जिले के आदिवासी गांवों में सांपों की 70 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। यहाँ की जैव-विविधता इतनी समृद्ध है कि कुछ प्रजातियां सिर्फ इसी क्षेत्र में ही देखने को मिलती हैं। इस स्थान पर कोबरा की 4 अलग-अलग प्रजातियां मौजूद हैं। इसके अलावा, दुनियाभर में अपने जहर के लिए मशहूर किंग कोबरा की उपस्थिति इस जगह को और भी रहस्यमयी बनाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां वाइपर और माम्बा जैसे अत्यंत विषैले सांप भी भारी संख्या में पाए जाते हैं।
आदिवासियों के साथ सांपों का सह-अस्तित्व
यहाँ रहने वाले बुजुर्ग बताते हैं कि आदिवासियों का इस भूमि पर सदियों से बसेरा है। सांप भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी उसी तरह यहां रह रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि सांपों के इतने बड़े खतरे के बावजूद लोगों ने कभी यहां से पलायन नहीं किया। स्थानीय लोग इन जहरीले जीवों के साथ ही जीवन जीने के आदी हो चुके हैं। वे प्रकृति के इस खौफनाक हिस्से को अपने जीवन का हिस्सा मानते हैं।
क्या भविष्य में बदलेगी यहां की स्थिति?
जशपुर की इसी ख्याति के चलते देश-विदेश से कई पर्यावरण प्रेमी यहाँ खिंचे चले आते हैं। सांपों के आतंक और इनके संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार यहाँ एक Snake Park बनाने की योजना पर काम कर रही है। इससे न केवल सांपों के अध्ययन में मदद मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। आने वाले समय में यह स्थान शोध का बड़ा केंद्र बन सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- जशपुर को नागलोक क्यों कहा जाता है?
जवाबः यहां जहरीले सांपों, विशेषकर कोबरा और करैत की बहुत अधिक संख्या पाई जाती है, इसलिए इसे नागलोक कहते हैं। - यहां सांपों की कितनी प्रजातियां पाई जाती हैं?
जवाबः छत्तीसगढ़ के जशपुर में सांपों की 70 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं। - यहां सांप अधिक क्यों दिखाई देते हैं?
जवाबः गर्मियों में तपती जमीन और बारिश के मौसम में बिलों में पानी भरने के कारण सांप बाहर आ जाते हैं। - क्या यहां किंग कोबरा पाया जाता है?
जवाबः हां, जशपुर में दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में शुमार किंग कोबरा की प्रजातियां भी पाई जाती हैं। - क्या सरकार यहां के लिए कुछ कर रही है?
जवाबः जी हां, सांपों के संरक्षण और लोगों की सुरक्षा के लिए यहां स्नैक पार्क बनाने की तैयारी चल रही है।


