Bengal Politics : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मदन मित्रा ने बागी तेवर अपना लिए हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर चल रहे बागी खेमे में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। यह खेमा विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में सक्रिय है। ममता बनर्जी के लिए यह एक बड़ा सियासी झटका है।
मदन मित्रा पार्टी के बेहद पुराने और अनुभवी नेताओं में शुमार किए जाते हैं। वह सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और पार्टी संगठन में उनकी गहरी पकड़ है। मदन मित्रा का बागी खेमे में जाना पार्टी की अंदरूनी एकता पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी तक पार्टी आलाकमान की ओर से इस पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पार्टी के भीतर बढ़ रहा असंतोष
तृणमूल कांग्रेस के भीतर पिछले काफी समय से असंतोष की खबरें दबी जुबान में सुनी जा रही थीं। मदन मित्रा का यह कदम उस असंतोष के सार्वजनिक होने का स्पष्ट संकेत है। पार्टी के कई कार्यकर्ता और स्थानीय नेता भी बदलते घटनाक्रम पर नजर गड़ाए हुए हैं। यही वजह है कि राज्य के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
ये तीन नेता भी थाम चुके हैं बीजेपी का दामन
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य की उपस्थिति में औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। तीनों सांसद टीएमसी के राज्यसभा सांसद थे। राज्य में टीएमसी की हार के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
FAQs
मदन मित्रा ने क्या बड़ा कदम उठाया है?
वरिष्ठ नेता मदन मित्रा तृणमूल कांग्रेस के बागी खेमे में शामिल हो गए हैं।
बागी खेमे का नेतृत्व कौन कर रहा है?
यह बागी खेमा विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में चल रहा है।
मदन मित्रा की पार्टी में क्या अहमियत थी?
मदन मित्रा पूर्व मंत्री और पार्टी के बेहद अनुभवी और पुराने नेता रहे हैं।
इस घटना का असर क्या होगा?
इससे तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक एकता प्रभावित होगी और पार्टी की चुनावी रणनीति पर भी असर पड़ेगा।
क्या पार्टी आलाकमान की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आई है?
अभी तक पार्टी आलाकमान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


