Jantar Mantar History: राजधानी नई दिल्ली का जंतर-मंतर हमेशा से आंदोलनों के लिए एक प्रमुख स्थान माना जाता है। वर्तमान समय में यहां कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में नीट पेपर लीक के खिलाफ भारी विरोध-प्रदर्शन जारी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी नाम से 62 साल पहले भारतीय सिनेमा जगत में एक फिल्म भी रिलीज हुई थी? इस फिल्म में काले जादू के टोटके की रहस्यमयी कहानी को बेहद अनोखे अंदाज में दर्शाया गया था।

क्या है 62 साल पुरानी फिल्म जंतर-मंतर का इतिहास?

यह फिल्म 1964 में सिनेमाघरों में रिलीज की गई थी। इस मूवी में कोई बड़ा स्टार कास्ट या सुपरस्टार शामिल नहीं था। इसके बावजूद यह फिल्म अपने समय में काफी चर्चा में रही थी। फिल्म जानकारों के अनुसार इसका निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर राधाकांत ने किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह एक कम बजट की फिल्म थी, जिसे उस दौर के हिसाब से तैयार किया गया था। हालांकि, कम बजट होने के बावजूद इसने दर्शकों के बीच अपनी एक अलग जगह बनाई थी।

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क्या थी इस पुरानी फिल्म की कहानी?

फिल्म जंतर-मंतर में पौराणिक और फैंटसी ड्रामा कहानी को पर्दे पर दिखाया गया था। यह पूरी कहानी एक जादुई अंगूठी के इर्द-गिर्द घूमती है। इसके अलावा काली शक्तियों और टोना-टोटके जैसे कई गुप्त पहलुओं को इस मूवी में प्रमुखता से शामिल किया गया था। जब यह फिल्म थिएटर्स में रिलीज हुई, तब शुरुआती दिनों में इसे कुछ खास रिस्पॉन्स नहीं मिला था। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, इस मूवी ने दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल करनी शुरू कर दी। यही वजह है कि आज 62 साल बाद भी इसे एक खास श्रेणी में याद किया जाता है।

कलाकारों का अभिनय और उस दौर का सिनेमा

इस फिल्म में अभिनेता महिपाल और अभिनेत्री विजय चौधरी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इनके साथ-साथ बाबू राजे, जीवनकला और उल्हास जैसे कई मंजे हुए कलाकार भी अहम किरदारों में नजर आए थे। अगर बात करें 60 के दशक की तो उस दौर में मुगल-ए-आजम, जब-जब फूल खिले और गाइड जैसी बड़ी फिल्में चर्चा में थीं। लेकिन बी ग्रेड फिल्मों की श्रेणी में इस फिल्म ने अपनी अलग पहचान बनाई और उस दौर में सफल साबित हुई।

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