Snake Bite Scam: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सामने आए 17.24 करोड़ रुपये के चर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जाली दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा राशि हड़पने के इस बड़े मामले में पुलिस ने राजस्व विभाग पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एसडीएम कार्यालय के दो बाबुओं और तहसील कार्यालय के एक क्लर्क को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
गिरफ्तारी और घोटाले का विवरण
इस पूरे मामले के तहत, सरकंडा पुलिस ने रविवार को कार्रवाई करते हुए एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक व गरीब राम बिंझवार और तहसील कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि इन कर्मचारियों ने अपने आधिकारिक लॉगिन आईडी का इस्तेमाल कर फर्जी सर्पदंश प्रकरण तैयार किए और शासन से भारी-भरकम मुआवजा राशि स्वीकृत कराने में अहम भूमिका निभाई। इससे पहले तोरवा पुलिस ने सिम्स की तत्कालीन डॉक्टर प्रियंका सोनी को फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जिसके तहत अब तक ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा और अधिवक्ता रंजीत चतुर्वेदी समेत कई लोग सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं, जबकि मुख्य आरोपी अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार की तलाश जारी है।
विधानसभा में उठा मुद्दा
यह पूरा घोटाला तब उजागर हुआ जब बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में इस मामले को जोर-शोर से उठाया। पिछले पांच वर्षों के दौरान सर्पदंश से हुई मौतों के मामलों की जब गहराई से छानबीन की गई, तो पता चला कि एक बड़े सिंडिकेट ने फर्जी दावों के जरिए शासन के खजाने को करोड़ों का चूना लगाया है। इस मामले में अब तक कुल 14 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और एसएसपी रजनेश सिंह खुद इस पूरी उच्चस्तरीय जांच की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस फर्जीवाड़े की जड़ें कहां तक फैली हुई हैं।
प्रशासनिक और आधिकारिक रुख
एसएसपी और अन्य जांच अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस के अनुसार पिछले पांच वर्षों के दौरान संदिग्ध मामलों में रिपोर्ट देने वाले अन्य डॉक्टरों और कर्मचारियों से भी लगातार पूछताछ की जा रही है। जिले में ऐसे करीब 15 संदिग्ध प्रकरणों की विशेष रूप से पहचान की गई है, और आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े कई और बड़े खुलाسه होने तथा और गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।
जनजीवन, शासन और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रभाव
इस सनसनीखेज घोटाले के सामने आने से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आम जनता का मानना है कि इस तरह के मामलों से जरूरतमंदों तक पहुंचने वाली राहत राशि पर डाका पड़ता है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप है और सरकारी कार्यालयों में फाइलों की स्क्रूटनी तथा कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं को रोका जा सके।
संक्षेप में कहें तो, बिलासपुर का सर्पदंश मुआवजा घोटाला राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक घोटालों में से एक बनता जा रहा है। पुलिस और जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए लगातार दबिश दे रही हैं। इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियों और नए खुलासों की संभावना है, जिसकी हर अपडेट समय पर मिलती रहेगी।
(FAQs) अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बिलासपुर में कितने करोड़ का सर्पदंश मुआवजा घोटाला सामने आया है?
बिलासपुर जिले में 17.24 करोड़ रुपये का कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाला सामने आया है।
- हाल ही में पुलिस ने राजस्व विभाग के किन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है?
पुलिस ने एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक व गरीब राम बिंझवार और तहसील कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर को गिरफ्तार किया है।
- यह मामला सबसे पहले किसने उठाया था?
यह मामला विधानसभा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा उठाए जाने के बाद सुर्खियों में आया था।
- फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में किसकी गिरफ्तारी हुई थी?
तोरवा पुलिस ने सिम्स की तत्कालीन डॉक्टर प्रियंका सोनी को फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आरोप में गिरफ्तार किया था।
- इस पूरे मामले की निगरानी कौन कर रहा है?
बिलासपुर के एसएसपी रजनेश सिंह खुद इस पूरे घोटाले की जांच की निगरानी कर रहे हैं।


