MP Uniform Civil Code: मध्य प्रदेश विधानसभा में आज का दिन बेहद हंगामेदार और ऐतिहासिक रहा। सदन में भारी गहमागहमी के बीच ‘समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026’ को पारित कर दिया गया। इस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में “जय-जय सियाराम” के नारे लगाए, जबकि इसके अलावा मध्य प्रदेश राजमार्ग विधेयक भी चर्चा के लिए पेश किया गया। हंगामे और तीखी बहस के बीच विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और पक्ष-विपक्ष का पक्ष
सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूसीसी के पक्ष में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में अलग-अलग मजहबी तौल कांटा नहीं होगा, बल्कि सभी एक ही बांट से तौले जाएंगे। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि समानता हमारी संस्कृति का मूल है और जब भगवान की दृष्टि में सब एक हैं, तो इंसान के बनाए कानूनों में भेदभाव क्यों होना चाहिए। सीएम ने कहा कि राम से रहीम तक और अमर से एंथोनी तक पूरा देश एक संविधान से चलेगा। इसके साथ ही गोवा, उत्तराखंड और असम के बाद मध्य प्रदेश भी इस कानून को अपनाने वाले चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल हो गया है।
कांग्रेस का विरोध और प्रवर समिति को भेजने की मांग
विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और विधायक आरिफ मसूद ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया। कांग्रेस विधायकों की मुख्य मांग थी कि यूसीसी को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए और ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विधायक आरिफ मसूद ने संविधान के अनुच्छेद 29 का हवाला देते हुए अल्पसंख्यकों और मुस्लिम समुदाय की परंपराओं व संरक्षण का मुद्दा उठाया। वहीं, भाजपा विधायकों जैसे रामेश्वर शर्मा और सीता शरण शर्मा ने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए विधेयक का समर्थन किया।
मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के आधिकारिक बयान
चर्चा के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाते हुए स्पष्ट किया कि इस विधेयक को लाने से पहले जनता के बीच जाकर लगभग 10 लाख लोगों से राय ली गई है। मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी विपक्ष से सवाल किया कि क्या कांग्रेस आदिवासियों को उनकी संस्कृति से दूर रखना चाहती है, क्योंकि जनजातियों को उनकी परंपराओं के चलते इस दायरे से विशेष सुरक्षा दी गई है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने जोर देकर कहा कि एक देश, एक विधान के नारे के तहत यह कानून राज्य के हर नागरिक को समान अधिकार देने के लिए लाया गया है।
जनजीवन, शासन और राजनीतिक प्रभाव
इस नए विधेयक के पारित होने का सीधा असर राज्य की कानूनी व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ेगा। एक तरफ जहां सरकार इसे समानता और न्याय की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा मान रहे हैं। आने वाले दिनों में इस कानून के क्रियान्वयन और विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाओं को लेकर राज्य की राजनीति में और गर्माहट आने की पूरी संभावना है।
संक्षेप में कहें तो, भारी विरोध और हंगामे के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 का पारित होना राज्य के विधायी इतिहास का एक बड़ा घटनाक्रम है। इस संबंध में आगे के प्रशासनिक नियमों और दिशा-निर्देशों को लेकर सरकार की ओर से जल्द ही नए अपडेट सामने आ सकते हैं।
(FAQs) अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मध्य प्रदेश विधानसभा में कौन-सा प्रमुख विधेयक पारित हुआ है?
समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 विधानसभा में पारित किया गया है।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सदन में क्या मुख्य बात कही?
सीएम ने कहा कि मध्य प्रदेश में अलग-अलग मजहबी तौल कांटा नहीं होगा और सभी नागरिक एक ही कानून के तहत आएंगे।
- विपक्ष की मुख्य मांग क्या थी?
कांग्रेस विधायकों ने मांग की कि इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय प्रवर समिति को भेजा जाए और ओबीसी आरक्षण पर चर्चा हो।
- चर्चा के दौरान किन मुद्दों पर तीखी नोंकझोक हुई?
आरिफ मसूद द्वारा संविधान के अनुच्छेद 29 और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के सवाल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
- यह विधेयक किन अन्य राज्यों में पहले से लागू या चर्चा में रहा है?
गोवा, उत्तराखंड और असम के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस दिशा में आगे बढ़ने वाला राज्य बन गया है।


