Rahul Gandhi Protest: नीट परीक्षा में कथित धांधली, लगातार होते पेपर लीक और देश भर में जारी छात्र आंदोलनों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष का गुस्सा भड़क उठा है। बुधवार को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल समेत कई प्रमुख विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार पर काले कपड़े पहनकर सरकार के खिलाफ पुरजोर प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं का यह प्रदर्शन नीट मामले में पारदर्शी जांच, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और हाल ही में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों तथा युवा नेताओं पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया। इस एकजुट प्रदर्शन के जरिए विपक्षी गठबंधन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है।
संसद भवन परिसर में सुबह से ही विपक्षी सांसदों की हलचल तेज रही। विपक्षी दल के सांसद काले लिबास में एकजुट हुए और नारेबाजी करते हुए मकर द्वार तक पहुंचे। प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवाओं और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है तथा परीक्षा प्रणाली की विफलताओं को छिपाने के लिए तानाशाही रवैया अपना रही है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रदर्शन के दौरान सीधे तौर पर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए। राजद सांसद संजय यादव ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में देश में 150 से अधिक परीक्षाओं के पर्चे लीक हो चुके हैं, जिससे देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है और बेरोजगारी अपने 50 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई से उपजा आक्रोश
दरअसल, इस ताजा विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह पिछले कुछ दिनों में राजधानी दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में घटे घटनाक्रम हैं। सोमवार और मंगलवार को परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली की सड़कों पर उतरे छात्रों तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। जंतर-मंतर और राजाजी मार्ग से मार्च निकाल रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल प्रयोग और लाठीचार्ज के बाद माहौल और ज्यादा गरमा गया। इस मार्च के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव सहित कई दिग्गज नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर छत्रसाल स्टेडियम और मंदिर मार्ग थाने भेजा था। इस घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जबलपुर, गुवाहाटी, भुवनेश्वर और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में भी उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिए।
नेताओं का क्या है कहना?
“हमारे साथ क्या हुआ, यह मुख्य बात नहीं है। मुख्य सवाल यह है कि क्या देश के लाखों होनहार छात्रों के साथ जो हो रहा है, वह सही है? शिक्षा का बजट कम पड़ रहा है और दूसरी तरफ बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए जा रहे हैं। छात्र अपने हक के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार लाठी के दम पर लोकतंत्र को कुचल रही है।” — प्रियंका गांधी, सांसद व कांग्रेस नेता
“संसद से लेकर सड़क तक पुलिस का बिना नेम टैग के आकर लाठी चलाना बेहद आपत्तिजनक है। जब देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतर चुकी हो, तब विपक्ष चुप बैठकर यह बर्बरता नहीं देख सकता। सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़कर छात्रों से संवाद करना होगा।” — प्रमोद तिवारी, वरिष्ठ कांग्रेस सांसद
बीजेपी का क्या है रुख ?
प्रधानमंत्री आवास (लोक कल्याण मार्ग) के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अचानक धरने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आक्रामक रुख अपना चुकी है। राहुल गांधी के इस कदम को “अराजकता की पराकाष्ठा” करार देते हुए बीजेपी बुधवार (22 जुलाई) को देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन करने जा रही है। पार्टी के कार्यकर्ता आज दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय समेत कई राज्यों में कांग्रेस दफ्तरों का घेराव करेंगे। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी संसद या जंतर-मंतर पर युवाओं के मुद्दे उठाने के बजाय सिर्फ सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए राजनीतिक स्टंट कर रहे हैं। सत्ताधारी पार्टी का कहना है कि वे विपक्ष के नेता (LoP) जैसे गरिमापूर्ण और संवैधानिक पद का लगातार अवमूल्यन कर रहे हैं।
लोकतंत्र में विरोध की सीमाएं होती हैं: नितिन नवीन
मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राहुल गांधी के व्यवहार की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा,विपक्ष के नेता का पद बहुत सम्मानजनक होता है, लेकिन राहुल गांधी इसे गंभीरता से लेने के बजाय लगातार अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं। लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने का एक दायरा और मर्यादा होती है। जब विरोध मर्यादा लांघ दे, तो वह अराजकता बन जाता है। नितिन नवीन ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ किसी एक दल के नेता नहीं हैं, बल्कि वे देश के 140 करोड़ नागरिकों के चुने हुए प्रतिनिधि हैं। जिस तरह से राहुल गांधी अपने सहयोगियों के साथ पीएम आवास के पास पहुंचे और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की, उससे साफ है कि वे विपक्ष की जिम्मेदार राजनीति छोड़ ‘अराजक राजनीति’ का जरिया बनते जा रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. संसद भवन के मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों ने काले कपड़े क्यों पहने थे?
उत्तर: नीट परीक्षा धांधली, बार-बार हो रहे पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में सांसदों ने काले कपड़े पहने थे।
Q2. इस प्रदर्शन में कौन-कौन से मुख्य राजनीतिक दल शामिल हुए?
उत्तर: इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सहित कई प्रमुख विपक्षी दल शामिल रहे।
Q3. विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में क्यों लिया था?
उत्तर: दिल्ली में परीक्षा धांधली और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर निकाले जा रहे मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया था।
Q4. विपक्ष की मुख्य मांगें क्या हैं?
उत्तर: विपक्ष की मुख्य मांग नीट परीक्षा में हुई धांधली की पारदर्शी जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और पारदर्शी परीक्षा नीति बनाना है।
Q5. इस विरोध प्रदर्शन का छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: इस व्यापक विरोध प्रदर्शन से सरकार पर राष्ट्रीय स्तर की भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने का प्रशासनिक दबाव बढ़ेगा।


