Sawan 2026 की शुरुआत 30 जुलाई को होने जा रही है, जो इस बार भगवान शिव के भक्तों के लिए बेहद खास और फलदायी रहने वाली है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल सावन महीने के पहले ही दिन 4 दुर्लभ और शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं। 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलने वाले इस पावन महीने में पहले दिन बन रहे इन योगों के कारण भगवान भोलेनाथ की पूजा और जलाभिषेक का महत्व कई गुना बढ़ गया है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 30 जुलाई को सावन के पहले दिन आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, श्रवण नक्षत्र और गुरुवार का विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:18 बजे से 4:59 बजे तक रहेगा, जबकि अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि आयुष्मान योग में शिव जी का जलाभिषेक करने से उत्तम स्वास्थ्य मिलता है, वहीं सौभाग्य योग से घर में सुख और समृद्धि आती है। इसके अलावा गुरुवार को शुरुआत होने से भगवान शिव के साथ श्रीहरि विष्णु की कृपा भी भक्तों को मिलेगी।
लाखों श्रद्धालु हर साल सावन में सोमवार का व्रत करते हैं
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने में माता पार्वती ने कठोर तपस्या करके शिव जी को पति रूप में प्राप्त किया था। यही वजह है कि लाखों श्रद्धालु हर साल सावन में सोमवार व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाते हैं तथा कांवड़ यात्रा निकालते हैं। पिछले सालों की तुलना में इस बार सावन के पहले दिन बन रहे 4 दुर्लभ संयोगों को विद्वान धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ मान रहे हैं।
ऐसे करें भगवान शिव का जलाभिषेक
धार्मिक विद्वानों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सावन के पहले दिन तड़के उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद मंदिर जाकर शिवलिंग पर शुद्ध जल, गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। पूजा के दौरान शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल और चंदन अर्पित करना शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि पूजा के समय ‘ऊं नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का 108 बार जाप करें। चूंकि पहला दिन गुरुवार को है, इसलिए भगवान विष्णु को केले या पीली मिठाई का भोग लगाना भी विशेष फलदायी रहेगा।
मंदिरों में भीड़ और बाजारों पर असर
सावन की शुरुआत के साथ ही देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों, जैसे काशी विश्वनाथ, महाकालेश्वर और देवघर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। बाजार में बेलपत्र, फूल, फल, दूध और पूजन सामग्री की मांग तेजी से बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन ने कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा और ट्रैफिक के कड़े इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। इस धार्मिक आयोजन से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय कारोबार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- सावन 2026 कब से शुरू हो रहा है और कब समाप्त होगा?
सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई (गुरुवार) से हो रही है और इसका समापन 28 अगस्त (शुक्रवार) को होगा।
- सावन 2026 के पहले दिन कौन से 4 शुभ योग बन रहे हैं?
पहले दिन आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, श्रवण नक्षत्र और गुरुवार का दुर्लभ संयोग एक साथ बन रहा है।
- सावन के पहले दिन जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त क्या है?
सुबह ब्रह्म मुहूर्त 4:18 बजे से 4:59 बजे तक और दोपहर में अभिजित मुहूर्त 12:00 बजे से 12:54 बजे तक रहेगा।
- सावन के पहले दिन गुरुवार होने का क्या खास महत्व है?
गुरुवार को सावन शुरू होने से भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों का एक साथ अखंड आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- सावन में शिवलिंग पर क्या-क्या चढ़ाना शुभ माना जाता है?
शिवलिंग पर जल, गंगाजल, कच्चा दूध, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल और चंदन चढ़ाना बेहद शुभ होता है।


