बिलासपुर। सर्पदंश मुआवजा घोटाले में पुलिस की जांच से परेशान होकर छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की बिलासपुर जिला इकाई ने संभागायुक्त से गुहार लगाई है। संघ ने एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार समेत राजस्व अधिकारियों के खिलाफ अनावश्यक आपराधिक जांच न करने की मांग की है।

संघ के प्रतिनिधियों ने संभागायुक्त सुनील जैन से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अपर कलेक्टर शिवकुमार बनर्जी ने किया।

राजस्व अधिकारियों ने जताई चिंता

संघ का कहना है कि प्राकृतिक आपदा राहत, विशेषकर सर्पदंश जनित मृत्यु के आर्थिक सहायता प्रकरणों में राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को अनावश्यक रूप से आपराधिक जांच में शामिल किया जा रहा है।

संघ ने तर्क दिया कि राजस्व न्यायालय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सक्षम प्राधिकारियों के प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर ही आदेश पारित करते हैं। यदि बाद में दस्तावेज फर्जी, कूटरचित या जाली पाए जाते हैं तो उसकी जवाबदेही दस्तावेज बनाने, प्रमाणित करने या प्रस्तुत करने वाले की होनी चाहिए, न कि आदेश देने वाले अधिकारी की।

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Fraud upon the Court मानकर हो कार्रवाई की मांग

ज्ञापन में मांग की गई कि जिन लोगों ने मिथ्या शपथपत्र, फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट या कूटरचित दस्तावेज पेश कर न्यायालय को गुमराह किया है, उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 227 से 231 के तहत कार्रवाई हो।

संघ ने इसे सामान्य धोखाधड़ी न मानकर “Fraud upon the Court” के रूप में देखने की मांग की।

साथ ही न्यायाधीश संरक्षण अधिनियम 1985 और राज्य शासन के 14 अक्टूबर 2024 के दिशा-निर्देशों का पालन करने की मांग की गई। इनमें राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को विधिक संरक्षण मिला हुआ है।

SOP बनाने और दिशा-निर्देश जारी करने की मांग

संघ ने राज्य शासन से मांग की कि:

  1. सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं कि राजस्व न्यायालयों की न्यायिक स्वतंत्रता का पालन हो।
  2. भविष्य में जांच के लिए पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग का संयुक्त SOP बनाया जाए, ताकि राहत योजनाओं का दुरुपयोग रोका जा सके।
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इस दौरान अपर कलेक्टर डॉ. ज्योति पटेल, एसडीएम मनीष साहू, प्रवेश पैकरा, शिवकुमार कंवर, नितिन तिवारी, डिप्टी कलेक्टर गबेल सहित संघ के पदाधिकारी मौजूद थे।

FAQ:

सवाल 1: मामला क्या है?

जवाब: सर्पदंश राहत प्रकरणों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आर्थिक सहायता के आरोपों को लेकर राजस्व अधिकारियों पर पुलिस जांच का दबाव है।

सवाल 2: अधिकारियों की मुख्य मांग क्या है?

जवाब: निर्दोष राजस्व अधिकारियों को संरक्षण दिया जाए और कार्रवाई केवल वास्तविक दोषियों पर हो।

सवाल 3: संघ ने किसे ज्ञापन सौंपा?

जवाब: संभागायुक्त सुनील जैन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

सवाल 4: कौन-कौन अधिकारी शामिल थे?

जवाब: एडीएम शिवकुमार बनर्जी, डॉ. ज्योति पटेल, एसडीएम मनीष साहू सहित कई राजस्व अधिकारी।

सवाल 5: संघ ने और क्या मांग की?

जवाब: फर्जी दस्तावेज पेश करने वालों पर “Fraud upon the Court” के तहत कार्रवाई और जांच के लिए SOP बनाने की मांग।