jantar mantar protest: नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा धांधलियों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस के बल प्रयोग के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई सोमवार 27 जुलाई को होगी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की याचिका लगाई है।
अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ से कहा, यह छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ा गंभीर मामला है। पुलिस की ज्यादती लगातार बढ़ रही है, इसलिए इसमें तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले को स्वीकार करते हुए सुनवाई की तारीख आज तय की।
jantar mantar protest: क्या है पूरा मामला
जंतर-मंतर पर यह विरोध प्रदर्शन 20 जून से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आह्वान पर शुरू हुआ था। छात्र राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए प्रसिद्ध क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी शामिल हुए थे। उन्होंने 28 जून से आमरण अनशन शुरू किया था। हालांकि, स्वास्थ्य बिगड़ने का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई की सुबह उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था।
jantar mantar protest: 20 जुलाई का ‘संसद चलो’ मार्च और झड़प
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों ने ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया था। दिल्ली पुलिस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है।
तय कार्यक्रम के मुताबिक जब बड़ी संख्या में छात्र संसद की ओर बढ़े, तो संसद भवन से लगभग 200 मीटर की दूरी पर उनकी पुलिस के साथ तीखी झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और अत्यधिक बल प्रयोग किया।


