राजनांदगांव। नक्सल समस्या के सफाए के दावों के बीच महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के अंदरूनी इलाकों में पुलिस को कथित नक्सल बैनर और पर्चे मिले हैं। नक्सल शहीद सप्ताह शुरू होने से कुछ दिन पहले मिले इन बैनर-पोस्टर को पुलिस ने जब्त कर लिया है।
मिली जानकारी के अनुसार भामरागढ़ तहसील के हिदुर-डोबुर मुख्य मार्ग पर पुलिस को नक्सलियों द्वारा फेंके गए बैनर और पर्चे मिले हैं। बैनर-पोस्टर में 28 जुलाई से 3 अगस्त तक नक्सल शहीद सप्ताह मनाने की अपील की गई है। नक्सली गतिविधि के संकेत मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं।
एसपी का बयान: असामाजिक तत्वों की करतूत भी हो सकती है
गढ़चिरौली एसपी एम. रमेश ने मीडिया से चर्चा में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला नक्सलियों की आड़ में असामाजिक तत्वों की हरकत लगती है। हालांकि पुलिस ने नक्सल समर्थकों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया है। फिलहाल पुलिस बैनर-पर्चे की सत्यता की जांच कर रही है।
पुलिस किन बिंदुओं पर कर रही जांच ?
गढ़चिरौली पुलिस इन बिंदुओं पर जांच कर रही है:
- बैनर और पर्चे कहां और कब लगाए गए ?
- इसमें असामाजिक तत्वों की भूमिका ?
- नक्सल समर्थकों का इसमें हाथ है या नहीं ?
- ग्रामीणों की इसमें क्या दिलचस्पी है ?
जब्त किए गए बैनर-पोस्टर को फॉरेंसिक जांच के लिए भी भेजा गया है।
शहीद सप्ताह की पृष्ठभूमि
बता दें कि नक्सलियों के पूर्ण सफाए से पहले हर साल 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीद सप्ताह मनाया जाता था। नक्सलियों के खात्मे के बाद यह पहला मौका है जब शहीद सप्ताह की तारीख नजदीक है। ऐसे में गढ़चिरौली में मिले बैनर-पोस्टर को पुलिस ने गंभीरता से लिया है।
FAQ: गढ़चिरौली में नक्सल बैनर-पर्चे
सवाल 1. गढ़चिरौली में कहां मिले नक्सल बैनर-पर्चे?
भामरागढ़ तहसील के हिदुर-डोबुर मुख्य मार्ग पर पुलिस को बैनर और पर्चे मिले हैं।
सवाल 2. बैनर-पर्चे में क्या लिखा था?
बैनर-पोस्टर में 28 जुलाई से 3 अगस्त तक नक्सल शहीद सप्ताह मनाने की अपील का उल्लेख है।
सवाल 3. पुलिस क्या कह रही है?
गढ़चिरौली एसपी एम. रमेश के अनुसार प्रथम दृष्टया यह असामाजिक तत्वों की करतूत लगती है। साथ ही नक्सल समर्थकों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया गया है।
सवाल 4. पुलिस आगे क्या कार्रवाई कर रही है?
पुलिस बैनर-पर्चे की सत्यता जांच रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इन्हें किसने और कब लगाया। क्षेत्र में सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।
सवाल 5. शहीद सप्ताह क्या होता है?
पहले नक्सली हर साल 28 जुलाई से 3 अगस्त तक अपने मारे गए साथियों की याद में शहीद सप्ताह मनाते थे। इस दौरान वे बैनर, पोस्टर और बंद का आह्वान करते थे।


