Kanker Malaria Outbreak: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मलेरिया आउटब्रेक ने चिंता बढ़ा दी है। बीते 2 दिनों में सरकारी छात्रावास में रहने वाले 2 छात्रों की मलेरिया से मौत हो गई। वहीं, अलग-अलग छात्रावासों के 11 छात्र मलेरिया संक्रमित पाए गए हैं। घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने पूरे जिले में निगरानी बढ़ा दी है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आरसी ठाकुर ने बताया कि जिले में अचानक मलेरिया का प्रकोप सामने आया है। प्रभावित छात्रावासों और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार जांच अभियान चला रही हैं। संक्रमित मरीजों का इलाज किया जा रहा है और सभी छात्रावासों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
22 जुलाई तक नहीं मिला था कोई संक्रमित
आदिम जाति कल्याण विभाग की सहायक आयुक्त जया मनु के अनुसार, 22 जुलाई को सभी छात्रावासों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच कराई गई थी। उस समय कोई भी छात्र मलेरिया संक्रमित नहीं मिला था। हालांकि, 24 जुलाई के बाद अचानक कई बच्चों में तेज बुखार और अन्य लक्षण सामने आए। इसके बाद जांच में लगातार मलेरिया के मामले मिलने लगे।
तीन बहनों में एक की मौत
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डोमाहर्रा गांव की रहने वाली 3 सगी बहनों को तेज बुखार होने पर शुक्रवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 25 जुलाई को 9 वर्षीय करीना विश्वकर्मा की मौत हो गई। उसकी दोनों बहनों का इलाज अभी जारी है।
छात्रावास के छात्र की भी गई जान
मर्दापोटी छात्रावास में कई छात्रों को बुखार और सिरदर्द की शिकायत हुई थी। जांच में 4 छात्र मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। इनमें 9 वर्षीय छात्र सुभाष कुमेटी की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे घर ले गए थे। रविवार सुबह हालत गंभीर होने पर उसे फिर जिला अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
11 छात्र मिले संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इरादाह और मर्दापोटी छात्रावास के कुल 11 छात्र मलेरिया संक्रमित पाए गए हैं। प्रभावित छात्रावासों में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं। सभी छात्रों की स्क्रीनिंग की जा रही है। संक्रमित बच्चों को दवाएं दी जा रही हैं और उनका इलाज जारी है।
CMHO ने क्या कहा?
CMHO डॉ. आरसी ठाकुर के अनुसार जिले में अचानक मलेरिया आउटब्रेक सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार छात्रावासों और प्रभावित गांवों में जांच कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई तक कोई भी बच्चा संक्रमित नहीं था। इसके बाद हालात तेजी से बदले और 2 बच्चों की मौत हो गई। इसलिए सभी छात्रावासों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मलेरिया क्या है?
मलेरिया एक परजीवी जनित बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
मलेरिया का इलाज
फिलहाल मलेरिया से बचाव के लिए व्यापक उपयोग वाली वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। बीमारी होने पर डॉक्टर एंटी मलेरिया दवाओं और बुखार कम करने वाली दवाओं से इलाज करते हैं। इलाज के दौरान कुछ मरीजों में सिरदर्द, पेट संबंधी परेशानी, धूप से संवेदनशीलता, कान में आवाज आना, एनीमिया और मानसिक असहजता जैसे दुष्प्रभाव भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
मलेरिया से कैसे बचें?
- मच्छरों से बचाव के लिए DEET युक्त रिपेलेंट क्रीम का इस्तेमाल करें।
- रात में मच्छरदानी लगाकर सोएं।
- घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाएं।
- पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
- सूखी पत्तियों और झाड़ियों की नियमित सफाई करें।
- शाम के समय मच्छरों वाले स्थानों पर जाने से बचें।
- बुखार आने पर तुरंत जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह लें।


