Anti-Paper Leak Bill In Parliament Today: देशभर में पेपर लीक के मामलों और परीक्षा सुधार को लेकर हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार Public Examinations Bill 2026 के जरिए कानून को और सख्त बनाने जा रही है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सोमवार को लोकसभा में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पेश करेंगे।
सरकार का कहना है कि नए संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक जैसे अपराधों पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
विपक्ष से चर्चा में शामिल होने की अपील
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से विधेयक पर चर्चा में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार पेपर लीक के खिलाफ ठोस कानून ला रही है। ऐसे में सभी दलों को इस पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए। केवल हंगामा करने से अच्छा संदेश नहीं जाएगा।
चल सकती है लंबी बहस
सूत्रों के मुताबिक, इस विधेयक पर लोकसभा में 8 से 10 घंटे तक चर्चा होने की संभावना है। एनडीए ने इस बहस में युवा सांसदों को प्रमुखता देने की रणनीति बनाई है। भाजपा की बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या सहित कई सहयोगी दलों के युवा सांसद चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं।
नए शिक्षा मंत्री भी रहेंगे मौजूद
लोकसभा में सोमवार को शिक्षा मंत्रालय से जुड़े प्रश्न भी सूचीबद्ध हैं। नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी प्रश्नकाल के दौरान सदन में मौजूद रहेंगे। मंत्रालय के अधिकारियों ने उन्हें संबंधित विषयों पर जानकारी दे दी है।
क्या है Public Examinations Bill 2026?
Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act वर्ष 2024 में लागू हुआ था। अब सरकार इसमें संशोधन कर इसे और प्रभावी बनाना चाहती है। नए संशोधन में केवल सजा बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष प्रावधान भी किए गए हैं।
Anti-Paper Leak Bill के प्रमुख प्रावधान
- पेपर लीक के मामलों में कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की जेल।
- दोषियों पर ₹50 लाख तक जुर्माना।
- संगठित परीक्षा अपराधों में कम से कम 7 वर्ष की जेल।
- ऐसे मामलों में ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान।
- मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट।
- मामलों का निपटारा 2 महीने के भीतर करने का लक्ष्य।
- परीक्षा से जुड़े 15 प्रकार के अवैध कृत्यों को कानून के दायरे में लाया गया है।
किन अपराधों को बनाया गया है दंडनीय?
एंटी पेपर लीक बिल में कई नई गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है। वर्तमान कानून के तहत पेपर लीक के मामलों में 3 से 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। वहीं संगठित गिरोहों के लिए 5 से 10 वर्ष की जेल और कम से कम ₹1 करोड़ जुर्माना तय है। नए संशोधन में न्यूनतम सजा, जुर्माने की राशि और सुनवाई की प्रक्रिया को और सख्त बनाया गया है।
- प्रश्नपत्र लीक करना।
- ओएमआर शीट से छेड़छाड़।
- फर्जी वेबसाइट बनाना।
- नकली एडमिट कार्ड जारी करना।
- परीक्षा प्रक्रिया में संगठित धोखाधड़ी।
क्यों लाया जा रहा है यह संशोधन?
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। इसी मुद्दे पर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई कदम उठाने की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के गठन की भी घोषणा की है। यह समिति भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के सुझाव देगी। बता दें कि लोकसभा में विधेयक पर विस्तृत चर्चा होगी। यदि सदन से इसे मंजूरी मिलती है, तो इसे राज्यसभा भेजा जाएगा। दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संशोधित कानून लागू होगा।


