CG CONGRESS: प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष दीपक बैज ने राजीव भवन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में राज्य सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। कांग्रेस पार्टी बिजली दरों में वृद्धि को वापस लेने, अडानी कंपनी के स्मार्ट मीटरों को हटाने और पूर्ववर्ती सरकार की ‘400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना’ को पुनः लागू करने की मांग को लेकर 1 अगस्त से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने जा रही है।
कांग्रेस के चरणबद्ध आंदोलन का रोडमैप
1 अगस्त (प्रेस वार्ता): राज्य के सभी जिलों में कांग्रेस द्वारा पत्रकार वार्ता आयोजित कर बिजली दरों में बढ़ोतरी का विरोध किया जाएगा।
2 अगस्त से (जन-अभियान): पार्टी कार्यकर्ता दो महीनों तक घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर हटाने और बिजली दर वृद्धि के विरोध में जनता से आवेदन फॉर्म भरवाएंगे।
दो माह बाद (बिजली दफ्तरों का घेराव): एकत्रित किए गए आवेदनों के साथ सभी जिलों के बिजली कार्यालयों (CSPDCL) का घेराव कर पावती ली जाएगी।
अंतिम चरण (मुख्यमंत्री निवास घेराव): जिला स्तर पर प्राप्त पावती को लेकर प्रदेश भर के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री (जो ऊर्जा मंत्री भी हैं) के निवास का घेराव करेंगे।
“भाजपा सरकार बनने के बाद अब तक 31.23 प्रतिशत तक बिजली के दाम बढ़ाए जा चुके हैं। हाल ही में 12% विद्युत ईंधन अधिभार (MPPS) जोड़ा गया और अब जुलाई से घरेलू व गैर-घरेलू दरों में फिर वृद्धि की गई है। सरकार से प्रदेश नहीं संभल रहा और आम जनता पर बेतहाशा बोझ डाला जा रहा है।”
— दीपक बैज, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
स्मार्ट मीटर और बिजली बिलों में गड़बड़ी का आरोप
पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला और प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि:
स्मार्ट मीटर की धांधली: केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के संसद में दिए बयान के अनुसार, स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह वैकल्पिक हैं और बिना उपभोक्ता की सहमति के इसे लगाना गैर-कानूनी है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में इसे जबरन थोपा जा रहा है।
अनुबंध भार में बदलाव: स्मार्ट मीटर की अधिक रीडिंग का हवाला देकर उपभोक्ताओं की बिना सहमति के उनके एग्रीमेंट लोड (अनुबंध भार) को बढ़ा दिया जा रहा है और पेनाल्टी जोड़ी जा रही है।
अन्य राज्यों का हवाला: उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में विरोध के बाद स्मार्ट मीटर फैसले को वापस लिया गया है, इसलिए छत्तीसगढ़ में भी इसे तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए।
कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें:
बिजली की बढ़ी हुई दरें तत्काल वापस ली जाएं और दाम घटाए जाएं।
‘400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना’ पुनः लागू की जाए।
अडानी कंपनी द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को वापस लिया जाए।
(FAQ) अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र.1: कांग्रेस पार्टी 1 अगस्त से किस मुद्दे को लेकर आंदोलन शुरू कर रही है?
उत्तर: कांग्रेस बिजली की बढ़ी हुई दरों, स्मार्ट मीटर जबरन लगाने और ‘400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना’ को बंद किए जाने के विरोध में आंदोलन शुरू कर रही है।
प्र.2: कांग्रेस के इस आंदोलन के मुख्य चरण क्या हैं?
उत्तर: आंदोलन की शुरुआत 1 अगस्त को जिला स्तरीय प्रेस वार्ता से होगी। 2 अगस्त से दो महीने का घर-घर आवेदन संग्रह अभियान चलेगा, जिसके बाद जिला बिजली दफ्तरों और अंत में मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा।
प्र.3: कांग्रेस ने राज्य सरकार पर बिजली दरों में कितनी वृद्धि का आरोप लगाया है?
उत्तर: कांग्रेस के अनुसार भाजपा सरकार के कार्यकाल में अब तक कुल 31.23% बिजली दरों की वृद्धि की जा चुकी है, जिसमें 12% ईंधन अधिभार और जुलाई 2026 की ताज़ा दर वृद्धि शामिल है।
प्र.4: स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस का क्या मुख्य विरोध है?
उत्तर: कांग्रेस का कहना है कि संसद में दिए बयान के अनुसार स्मार्ट मीटर वैकल्पिक हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में इन्हें उपभोक्ताओं की सहमति के बिना जबरन लगाया जा रहा है, जिससे बिजली बिल 3 से 4 गुना अधिक आ रहे हैं।
प्र.5: कांग्रेस की तीन मुख्य मांगें क्या हैं?
उत्तर: कांग्रेस की मांगें हैं— बिजली के दाम घटाना, 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना पुनः लागू करना और स्मार्ट मीटर प्रणाली को वापस लेना।


