Sawan2026: सावन का पवित्र माह शुरू हो चुका है. इस माह में भक्त महादेव के पवित्र धामों में जाकर उनकी पूजा करते हैं। महादेव का एक ऐसा ही पावन धाम किन्नर कैलाश भी है। ये हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। धार्मिक मान्यता है कि इस क्षेत्र का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से है।

हिमालय के गर्भ में बसा किन्नर कैलाश महादेव को बहुत प्रिय है। माना जाता है कि ये भगवान शिव का शीतकालीन निवास है। यहां का शिवलिंग अपने आप में बहुत अद्भुत है, क्योंकि ये पहाड़ों के बीच 12 महीने बर्फ से ढका रहता है। ये शिवलिंग 45 फीट ऊंचा और 16 फीट चौड़ा है। साल 1990 में यहां यात्रा शुरू हुई थी।

पार्वती कुंड से जुड़ी मान्यता


किन्नर कैलाश से कुछ नीचे पार्वती कुंड स्थित है। ये जगह मुख्य स्थान से 500 मीटर की दूरी पर है। यहां एक तालाब है, जहां गर्मियों में भी पानी बहुत ठंडा रहता है। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति होती है।

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दिन में सात बार रंग बदलने का रहस्य


माना जाता है कि जब लंका का राजा रावण मानसरोवर की यात्रा पर गया था तो उसने यहीं तपस्या की थी। इस जगह का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि किन्नर कैलाश का रंग दिन में सात बार बदलता है। जबकि इसके आसपास के पहाड़ों पर कोई असर नहीं होता। इतना ही नहीं, यहां मौजूद शिवलिंग का रंग भी बार-बार बदलता रहता है। अंधेरा होने के बाद कई बार शिवलिंग के ऊपर चमकती हुई रोशनी दिखाई देती है।

सावन में बढ़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

सावन के महीने में किन्नर कैलाश यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है। कठिन पर्वतीय रास्तों को पार कर श्रद्धालु प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन करते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं। यही वजह है कि हर साल सावन में इस पवित्र धाम की आस्था और भी बढ़ जाती है।

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