A beautiful view of the idol of Lord Shiva and the materials for the Shravan Monday puja.
On the auspicious occasion of Sawan Monday, the worship of Lord Shiva and the story associated with the fast hold special significance.

Sawan Somwar Vrat Katha 2026: भगवान शिव की उपासना के लिए समर्पित सावन का महीना इस साल 2026 में चल रहा है, जिसमें सोमवार के व्रतों का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जीवन में धन की कमी, करियर की बाधाओं या मानसिक चिंताओं से जूझ रहे लोग यदि सावन सोमवार का व्रत रखकर पूरी श्रद्धा से कथा सुनें, तो शिवजी की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं।

इस पवित्र महीने में शिव-पार्वती की आराधना से जुड़ी व्यापारी की यह पारंपरिक कथा पढ़ने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

धनी व्यापारी की कथा और शिव-पार्वती का वरदान

प्राचीन समय में एक नगर में एक बहुत धनी व्यापारी रहता था, जिसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान सुख न मिलने के कारण वह दुखी रहता था। इस इच्छा को पूरा करने के लिए वह हर सोमवार को व्रत रखकर विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करता था। व्यापारी की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने शिवजी से उसकी मनोकामना पूरी करने का आग्रह किया। शिवजी ने भाग्य और कर्म का विधान समझाते हुए माता पार्वती के विशेष आग्रह पर व्यापारी को पुत्र का वरदान दे दिया, लेकिन साथ ही यह भी शर्त रखी कि उस बच्चे की आयु केवल 12 वर्ष ही होगी।

काशी यात्रा और एक अनोखा विवाह प्रसंग

समय बीतने पर व्यापारी के घर पुत्र का जन्म हुआ, जो बड़ा होकर जब 11 साल का हुआ, तो उसे पढ़ाई के लिए काशी भेजने का फैसला किया गया। व्यापारी ने अपने बेटे के साथ उसके मामा को भेजा और रास्ते में यज्ञ व दान-पुण्य करने को कहा। यात्रा के दौरान वे एक ऐसे नगर में रुके जहां एक राजकुमारी का विवाह हो रहा था, लेकिन जिस राजकुमार से शादी होनी थी वह एक आंख से कमजोर था और इस बात को छिपाया जा रहा था। राजकुमार के पिता ने चाल चलकर व्यापारी के सुंदर और युवा बेटे को ही घोड़ी पर बिठाकर दूल्हा बना दिया और राजकुमारी से उसका विवाह संपन्न करा दिया।

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सत्य की बात और 12 वर्ष की आयु का प्रसंग

वह लड़का स्वभाव से बहुत सच्चा और ईमानदार था, इसलिए उसने मौका पाकर राजकुमारी के वस्त्र पर यह सत्य लिख दिया कि उसका विवाह उससे हुआ है, लेकिन असली दूल्हा कोई और है। यह सच्चाई सामने आने पर राजकुमारी के परिवार ने उसे तुरंत विदा नहीं किया और बारात बिना दुल्हन के लौट गई। इसके बाद लड़का और उसका मामा काशी पहुंच गए जहां वे पढ़ाई और धार्मिक अनुष्ठान करने लगे। ठीक उसी दिन, जब उस लड़के की आयु 12 वर्ष पूरी हुई, उसकी अचानक तबीयत बिगड़ी और कुछ ही समय में उसकी मृत्यु हो गई। भांजे की अचानक मृत्यु से उसके मामा का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

माता पार्वती के आग्रह पर मिला नया जीवन

घटनास्थल के पास से गुजरते समय भगवान शिव और माता पार्वती ने जब उस मृत बालक और उसके मामा का विलाप देखा, तो माता पार्वती का हृदय द्रवित हो गया। उन्होंने शिवजी से उस बालक को जीवित करने की प्रार्थना की। पहले तो शिवजी ने आयु पूरी होने का नियम बताया, लेकिन माता के अत्यधिक स्नेह और करुणा को देखकर उन्होंने बालक को तुरंत पुनर्जीवन दे दिया। शिवजी की कृपा से जीवित होने के बाद वह अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए मामा के साथ आगे बढ़ा और पढ़ाई समाप्त कर अपने घर की ओर लौटने लगा।

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घर वापसी और व्रत का फल

लौटते समय वे लोग उसी नगर में दोबारा रुके जहां उस लड़के का विवाह हुआ था। राजकुमारी के पिता ने उसे तुरंत पहचान लिया और अपनी पुत्री को आदर के साथ उसके साथ विदा कर दिया। जब वह अपने माता-पिता के पास पहुंचा, तो बेटे को जीवित पाकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसी रात भगवान शिव ने सोते हुए व्यापारी को स्वप्न में आकर दर्शन दिए और बताया कि उसके सावन सोमवार के व्रत तथा सच्ची आराधना से प्रसन्न होकर ही उन्होंने उसके पुत्र को लंबी आयु और नया जीवन प्रदान किया है। इस कथा से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि सच्चे मन से सावन सोमवार का व्रत करने वाले भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं।

5 FAQs

व्यापारी के पुत्र को जीवनदान किसने दिया था?

माता पार्वती के आग्रह और करुणा को देखकर भगवान शिव ने उस बालक को पुनः जीवित किया था।

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सावन सोमवार का व्रत क्यों रखा जाता है?

सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव की कृपा पाने, जीवन की परेशानियों (जैसे धन कमी और करियर बाधा) को दूर करने और मनोकामनाएं पूरी करने के लिए रखा जाता है।

सावन सोमवार व्रत कथा मुख्य रूप से किस से जुड़ी है?

यह कथा एक धनी व्यापारी, उसके 12 वर्ष की आयु वाले पुत्र और भगवान शिव-माता पार्वती के आशीर्वाद से जुड़ी हुई है।

व्यापारी के पुत्र को काशी क्यों भेजा गया था?

व्यापारी का पुत्र जब करीब 11 वर्ष का हुआ, तब उसे उच्च शिक्षा और अध्ययन के लिए काशी भेजने का निर्णय लिया गया था।

व्यापारी के पुत्र की मृत्यु का क्या कारण था?

भगवान शिव से वरदान मांगते समय यह तय हुआ था कि उस बालक की आयु केवल 12 वर्ष होगी, और आयु पूरी होने पर उसकी मृत्यु हो गई थी।