Vrat Recipes: सावन का महीना शुरू होते ही शिव भक्तों में उत्साह और आस्था का माहौल देखने को मिलता है। सावन सोमवार का व्रत केवल आस्तिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि यह शरीर को डिटॉक्स करने और संयम अपनाने का एक बेहतरीन माध्यम है। हालांकि, लंबे समय तक भूखे रहने या सही खान-पान न होने की वजह से कई बार कमजोरी, चक्कर आना या एसिडिटी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में व्रत के दौरान शरीर में पोषण और ऊर्जा का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

अगर आप भी व्रत के दौरान हर बार आलू और एक ही तरह के पकवान खाकर बोर हो चुके हैं, तो इस बार अपनी थाली में कुछ सेहतमंद और स्वादिष्ट विकल्प शामिल करें।

  1. साबूदाना खिचड़ी
    पोषण और फायदे: साबूदाना कार्बोहाइड्रेट का बेहतरीन स्रोत है जो शरीर को तुरंत ऊर्जा (Instant Energy) प्रदान करता है। इसमें डाली जाने वाली मूंगफली से शरीर को जरूरी प्रोटीन और हेल्दी फैट्स मिलते हैं।

बनाने का तरीका: साबूदाना, उबले आलू के छोटे टुकड़े, मूंगफली के दाने, हरी मिर्च और सेंधा नमक का उपयोग कर इसे तैयार करें। इसे ताजे दही के साथ खाने से स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाते हैं।

  1. मखाने की खीर
    पोषण और फायदे: मखाना कैल्शियम, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह व्रत के दौरान मीठा खाने की क्रेविंग को शांत करने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा रखता है।
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बनाने का तरीका: लो-फैट या टोंड दूध में मखाने को हल्का भूनकर पकाएं। इसमें स्वादानुसार गुड़ या शक्कर और बादाम-किशमिश जैसे सूखे मेवे मिलाएं।

  1. फल और दही की स्मूदी
    पोषण और फायदे: यह एक हल्का और हाइड्रेटिंग विकल्प है। केला, सेब, अनार या पपीता जैसे मौसमी फलों और ताजे दही से बनी यह स्मूदी विटामिन, मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स प्रदान करती है, जिससे गर्मी और थकान से राहत मिलती है।

बनाने का तरीका: अपनी पसंद के फलों को दही और थोड़े से दूध या पानी के साथ ब्लेंडर में फेंट लें। चाहें तो ऊपर से कुछ मेवे डाल सकते हैं।

  1. शकरकंद चाट
    पोषण और फायदे: शकरकंद में भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन ए और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं। यह धीरे-धीरे पचती है और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देती है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती।

बनाने का तरीका: उबली हुई शकरकंद के टुकड़े करें। इसमें सेंधा नमक, ताज़ी पिसी काली मिर्च, नींबू का रस और भुना हुआ जीरा पाउडर मिलाकर चटपटी चाट तैयार करें।

  1. सिंघाड़े के आटे का चीला
    पोषण और फायदे: सिंघाड़े का आटा ग्लूटेन-फ्री होता है और पचने में बहुत हल्का होता है। यह पेट को लंबे समय तक संतुष्ट रखता है।
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बनाने का तरीका: सिंघाड़े के आटे में मैश किया हुआ थोड़ा सा उबला आलू, हरी मिर्च, धनिया पत्ती और सेंधा नमक मिलाकर घोल तैयार करें। इसे तवे पर हल्का सा घी लगाकर दोनों तरफ से सेक लें।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आहार विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों के अनुसार, व्रत का मतलब खुद को तकलीफ देना नहीं, बल्कि शरीर को आराम देना है।

हाइड्रेशन है जरूरी: न्यूट्रिशनिस्ट्स सलाह देते हैं कि व्रत के दौरान केवल भोजन ही नहीं, बल्कि तरल पदार्थों का सेवन बहुत जरूरी है। दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी, नारियल पानी, या नींबू पानी का सेवन करना चाहिए।

एसिडिटी से बचाव: बहुत ज्यादा तली-भुनी चीजें (जैसे पूरी-पकौड़ी) खाने से एसिडिटी और ब्लोटिंग हो सकती है, इसलिए बेक्ड या उबले विकल्पों को प्राथमिकता दें।

जरूरी सावधानियां


शुगर और बीपी के मरीज: यदि आप डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की दवा लेते हैं, तो पूरी तरह भूखे रहने से बचें। समय-समय पर फल या दूध का सेवन करते रहें।

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खाली पेट न रहें: ज्यादा देर तक भूखे रहने से सिरदर्द या कमजोरी हो सकती है, इसलिए थोड़े-थोड़े अंतराल पर पौष्टिक आहार लेते रहें।

सिंघाड़ा या साबूदाना की मात्रा: जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं हैं, वे साबूदाना या सिंघाड़े के सेवन को सीमित मात्रा में ही रखें।

साफ-सफाई का ध्यान: फलाहार बनाते समय साफ-सफार्ई का विशेष ध्यान रखें और व्रत में केवल सेंधा नमक (Rock Salt) का ही उपयोग करें।