CG News: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित प्रदेश स्तरीय कलश वंदन अभियान के शुभारंभ समारोह में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में अब से संत रविदास जयंती यानी माघ पूर्णिमा के अवसर पर सरकारी अवकाश रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए संत रविदास के नाम पर नया राज्य अलंकरण पुरस्कार शुरू करने, नया रायपुर के प्रमुख चौक का नामकरण उनके नाम पर करने और माघ पूर्णिमा के दिन संपूर्ण राज्य में शुष्क दिवस (ड्राय डे) लागू रखने का ऐलान किया।
राजधानी रायपुर में आयोजित इस राज्य स्तरीय समारोह में संत रविदास समाज के प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं का विशाल जमावड़ा देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने बताया कि संत रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में शुरू हुआ यह कलश वंदन अभियान और विभिन्न जनजागरण कार्यक्रम आगामी फरवरी 2027 तक पूरे प्रदेश में निरंतर आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार संत रविदास के विचारों को प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था में उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह करने की बात कही कि छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर में संत रविदास के अमर और प्रेरणादायी संदेशों को सम्मानपूर्वक अंकित किया जाए, ताकि जनप्रतिनिधियों को हमेशा सामाजिक न्याय की प्रेरणा मिलती रहे।
कौन है संत शिरोमणि गुरु रविदास
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी ने 15वीं शताब्दी में भक्ति आंदोलन के दौरान समाज में व्याप्त ऊंच-नीच, जातिगत भेदभाव और आडंबरों के खिलाफ प्रखरता से आवाज उठाई थी। उनकी कालजयी रचनाओं और शिक्षाओं ने सदियों से मानवता, समानता और भातृत्व भाव का मार्ग दिखाया है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उनकी 650वीं जयंती वर्ष को इतने व्यापक पैमाने पर मनाने के पीछे का मूल उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके महान विचारों से जोड़ना है। राज्य में पहली बार किसी संत के सम्मान में पूरे वर्ष भर (फरवरी 2027 तक) जिला और ब्लॉक स्तर पर कलश यात्राओं व सांस्कृतिक सम्मेलनों का खाका तैयार किया गया है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा ?
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “संत रविदास जी के विचार केवल एक वर्ग विशेष के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के कल्याण और सामाजिक समरसता के आधार स्तंभ हैं। राज्य सरकार उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सम्मान पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। माघ पूर्णिमा पर शासकीय अवकाश और राज्य अलंकरण पुरस्कार की शुरुआत उनके प्रति पूरे प्रदेश की ओर से एक सच्ची श्रद्धांजलि है।” कार्यक्रम में मौजूद संत रविदास समाज के प्रमुखों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के इन फैसलों का जोरदार स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया।


