Supreme Court hearing on CBSE three language policy for Class 9 students
CBSE के तीन भाषा नियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग।

Supreme Court CBSE Three Language Policy: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को CBSE की कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू तीन-भाषा नियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, इसलिए मामले की सुनवाई बुधवार या गुरुवार को की जाए। इस पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, हम देखेंगे।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि CBSE की नई भाषा नीति लागू हो चुकी है और छात्रों पर इसका असर पड़ रहा है। इसलिए मामले की तत्काल सुनवाई आवश्यक है।

याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि नई नीति को लागू करने के लिए न तो पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं और न ही जरूरी पाठ्यपुस्तकें। उनका तर्क है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस नियम को लागू करना व्यावहारिक नहीं है। इससे पहले भी याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि CBSE का सर्कुलर शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के विपरीत है और छात्रों पर बिना विकल्प के भाषाएं थोपी जा रही हैं।

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केंद्र, CBSE और NCERT का पक्ष

केंद्र सरकार, CBSE और NCERT ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने-अपने हलफनामों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत तीन-भाषा फार्मूले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यह नीति बहुभाषावाद, भारतीय भाषाओं के संरक्षण और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई है। तीनों संस्थाओं ने अदालत से इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज करने की मांग की है।

तीन भाषा नियम क्या है?

CBSE के 15 मई 2026 के सर्कुलर के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया गया है।

क्या है नई व्यवस्था ?

  • कक्षा 9 में तीन भाषाएं (R1, R2 और R3) पढ़ना अनिवार्य होगा।
  • इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है।
  • विदेशी भाषा चुनने का विकल्प तभी मिलेगा, जब छात्र पहले दो भारतीय भाषाएं पढ़ चुके हों।
  • यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप लागू की गई है।
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पहले क्या निर्देश दिए थे?

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, CBSE और NCERT से इस नीति पर जवाब मांगा था। साथ ही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से CBSE की लॉजिस्टिक तैयारियों पर रिपोर्ट भी मांगी गई थी।