Sawan 2026 Surya Grahan: भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास में इस बार एक दुर्लभ खगोलीय घटनाक्रम देखने को मिलेगा। साल 2026 के सावन महीने में मात्र 15 दिनों के भीतर सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों लगने जा रहे हैं। यह स्थिति 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद दोबारा बन रही है। पहला ग्रहण 12 अगस्त को श्रावण अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा, जबकि दूसरा ग्रहण 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के पर्व पर लगेगा। ज्योतिषशास्त्र और खगोलीय विज्ञान दोनों के लिहाज से इस घटना को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समय सारणी के अनुसार, 12 अगस्त की रात 09 बजकर 04 मिनट पर सूर्य ग्रहण की शुरुआत होगी, जो अगली सुबह 13 अगस्त को 04 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा। इसके ठीक 15 दिन बाद 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन सुबह 06 बजकर 53 मिनट से साल का अंतिम चंद्र ग्रहण शुरू होगा और दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। खगोलीय आंकड़ों के मुताबिक, 28 अगस्त को दुनिया के कई हिस्सों में ‘ब्लड मून’ का नजारा दिखेगा, जिसमें चंद्रमा गहरे लाल और भूरे रंग का दिखाई देगा।
पिछली बार कब बना था संयोग ?
इतिहास के पन्नों को पलटें तो इससे पहले साल 2008 के श्रावण मास में ऐसा ही संयोग देखा गया था। उस समय 1 अगस्त 2008 को हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगा था और 17 अगस्त 2008 को श्रावण पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हुआ था। ठीक 18 साल बाद 2026 में प्रकृति ने इसी घटनाक्रम को दोहराया है। पंचांग और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, एक ही महीने में दो ग्रहण का पड़ना वैश्विक मौसम और सामाजिक उथल-पुथल के दृष्टिकोण से विशेष माना जाता है।
सूतक काल और धार्मिक मान्यताएं
आमतौर पर सूर्य ग्रहण से 12 घंटे और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसमें शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। हालांकि, 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण दोनों ही भारत में दिखाई नहीं देंगे। भारतीय दृश्यता न होने के कारण मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और पूजा-पाठ, हरियाली अमावस्या का स्नान-दान तथा रक्षाबंधन का पर्व सामान्य रूप से मनाया जा सकेगा।
राशियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
भले ही भारत में सूतक काल का नियम लागू न हो, लेकिन खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इन दोनों ग्रहणों का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, 15 दिनों के भीतर दो ग्रहणों का होना बाजार में उतार-चढ़ाव, वैश्विक राजनीति में परिवर्तन और मौसमी बदलावों के संकेत देता है। आम जनमानस के लिए सलाह दी गई है कि ग्रहण काल के दौरान मंत्र जाप और दान-पुण्य करना फलदायी रहेगा, जबकि भारत में दृश्यता न होने से दैनिक जीवन प्रभावित नहीं होगा।
FAQs
Q: सावन 2026 में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कब-कब हैं?
उत्तर: सावन में पहला सूर्य ग्रहण 12 अगस्त (हरियाली अमावस्या) को और दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त (रक्षाबंधन) को लगेगा।
Q: क्या 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
उत्तर: नहीं, 12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
Q: क्या रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण का सूतक काल लगेगा?
उत्तर: नहीं, 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण भारत में अदृश्य रहने के कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
Q: इससे पहले सावन में दो ग्रहण कब लगे थे?
उत्तर: इससे पहले 18 साल पहले यानी साल 2008 के सावन महीने में अमावस्या और पूर्णिमा पर दो ग्रहण लगे थे।
Q: ग्रहण अदृश्य होने पर क्या पूजा-पाठ की जा सकती है?
उत्तर: हां, भारत में ग्रहण दिखाई न देने पर सूतक के नियम लागू नहीं होते, इसलिए सामान्य तरीके से पूजा-पाठ की जा सकती है।


