Agriculture Tips: जशपुर जिले के ग्राम पतराटोली के किसान अनारथ साय ने संरक्षित खेती, उद्यानिकी और फसल विविधीकरण को अपनाकर खेती को आत्मनिर्भरता का आधार बनाया है। वे शेडनेट हाउस में ग्राफ्टेड टमाटर की खेती के साथ ऑयल पाम, आम, लीची, स्ट्रॉबेरी और फूलगोभी का उत्पादन कर रहे हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत उन्हें 14.20 लाख रुपए का अनुदान भी मिला है।
शेडनेट हाउस में कर रहे ग्राफ्टेड टमाटर की खेती
अनारथ साय ने उद्यानिकी विभाग की योजना का लाभ लेकर राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत एक एकड़ क्षेत्र में शेडनेट हाउस स्थापित किया है। इसकी कुल लागत 28.40 लाख रुपए रही, जिसमें विभाग की ओर से 14.20 लाख रुपए का अनुदान दिया गया। शेडनेट हाउस में वे ग्राफ्टेड टमाटर की आधुनिक तकनीक से खेती कर रहे हैं। संरक्षित वातावरण में फसल को मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने के साथ उत्पादन प्रबंधन में भी सुविधा मिल रही है।
ऑयल पाम से लेकर आम और लीची तक की खेती
अनारथ साय ने अपनी खेती को केवल एक फसल तक सीमित नहीं रखा है। उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर वे ऑयल पाम की खेती भी कर रहे हैं। इसके अलावा समेकित उद्यानिकी विकास योजना के तहत 2 हेक्टेयर क्षेत्र में आम और लीची का बगीचा तैयार किया है। फलदार पौधों से उन्हें आने वाले वर्षों में निरंतर उत्पादन और आय का आधार मिलने की उम्मीद है।
एक ही खेत में स्ट्रॉबेरी, टमाटर और फूलगोभी
अनारथ साय ने बागवानी फसलों के बीच खाली जमीन का भी बेहतर इस्तेमाल किया है। उन्होंने इंटरक्रॉपिंग यानी अंतरवर्ती खेती को अपनाते हुए स्ट्रॉबेरी, टमाटर और फूलगोभी जैसी फसलों का उत्पादन शुरू किया है। इससे एक ही खेत से अलग-अलग फसलों का उत्पादन हो रहा है और अलग-अलग समय पर आय का रास्ता भी बन रहा है।
फसल विविधीकरण को बनाया खेती का आधार
किसान अनारथ साय का मानना है कि केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय कई फसलों को एक साथ अपनाने से खेती में जोखिम कम किया जा सकता है। उपलब्ध जमीन और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर सालभर आय के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उनकी खेती में संरक्षित खेती, बागवानी, फलदार पौधे और अंतरवर्ती फसलें एक साथ शामिल हैं। यही एकीकृत कृषि प्रणाली उनकी खेती को अलग पहचान देती है।
जशपुर में बढ़ रहा आधुनिक खेती का दायरा
अनारथ साय का उदाहरण बताता है कि सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर किसान पारंपरिक खेती के साथ आय के नए साधन तैयार कर सकते हैं। जशपुर में उद्यानिकी और संरक्षित खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों के लिए फसल विविधीकरण के अवसर भी बढ़ रहे हैं।


