Mahasamund Farmer Success Story: महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम भदरसी की किसान कुमारी चंद्राकर ने पारंपरिक धान की खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर अपनी कृषि आय बढ़ाई है। धान की खेती में अधिक लागत और अपेक्षाकृत कम उत्पादन के बाद उन्होंने सब्जियों और फूलों की खेती शुरू की। वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत गेंदा फूल की खेती कर उन्होंने प्रति एकड़ करीब 2 लाख 7 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित की।
धान की खेती के साथ सब्जियों और फूलों की ओर बढ़ा रुझान
कुमारी चंद्राकर पति दाऊलाल चंद्राकर के पास कुल 0.64 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है। धान की खेती में अधिक लागत और अपेक्षाकृत कम उत्पादन के कारण उनका रुझान धीरे-धीरे उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़ा। उन्होंने धनिया, प्याज, बैंगन, मूली और भाजी सहित अलग-अलग सब्जियों की खेती शुरू की। इसके साथ ही फूलों की खेती को भी अपनी नियमित कृषि गतिविधियों में शामिल किया।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिला 12,800 रुपये का अनुदान
वर्ष 2025-26 में कुमारी चंद्राकर ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के पुष्प क्षेत्र विस्तार घटक के तहत गेंदा फूल की खेती की। उन्होंने अपनी 0.64 हेक्टेयर सिंचित भूमि में गेंदा की फसल लगाई। शासकीय योजना के तहत उन्हें 0.64 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदा उत्पादन के लिए 12,800 रुपये का अनुदान DBT के माध्यम से मिला। योजना से मिले इस सहयोग ने उन्हें उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। खेती में वे ड्रिप सिंचाई और कृषि यंत्रों जैसी नई तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रही हैं।
प्रति एकड़ 20 क्विंटल गेंदा उत्पादन
कुमारी चंद्राकर के मुताबिक, गेंदा की खेती उनके लिए आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हुई। उन्होंने प्रति एकड़ करीब 20 क्विंटल गेंदा का उत्पादन प्राप्त किया। उत्पादन को उन्होंने लगभग 31 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा। खेती से जुड़े अन्य खर्च निकालने के बाद उन्हें प्रति एकड़ करीब 2 लाख 7 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।
बाजार की मांग के अनुसार खेती पर जोर
गेंदे की खेती से बेहतर आमदनी मिलने के बाद कुमारी चंद्राकर का खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। अब वे पारंपरिक फसलों के साथ बाजार की मांग के अनुसार उद्यानिकी फसलों को भी प्राथमिकता दे रही हैं। उनके खेतों में सब्जियों और फूलों की फसल देखकर रिश्तेदारों के साथ आसपास के किसान भी उद्यानिकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कुमारी चंद्राकर की खेती अब क्षेत्र के किसानों के लिए आय बढ़ाने के नए विकल्प की मिसाल बन रही है।


