Chhattisgarh Shiva Temples: सावन में भगवान शिव के दर्शन के लिए छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिवधामों में जाने की योजना बना रहे हैं तो प्रदेश के इन 8 मंदिरों के बारे में जानना उपयोगी होगा। जशपुर के मधेश्वर महादेव धाम से लेकर कवर्धा के भोरमदेव, रायपुर के हटकेश्वर महादेव, राजिम के कुलेश्वर महादेव और गरियाबंद के भूतेश्वर महादेव तक,
इन मंदिरों की अपनी अलग धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान है। कुछ मंदिर प्राचीन स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध हैं तो कुछ प्राकृतिक शिवलिंग और स्थानीय मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास महत्व रखते हैं।
1. मधेश्वर महादेव धाम, जशपुर
जशपुर जिले की मयाली पहाड़ी पर स्थित मधेश्वर महादेव धाम प्राकृतिक शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह क्षेत्र वर्षों से साधु-संतों की तपोभूमि रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यहां सड़क, सीढ़ियां, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए दूसरी सुविधाओं का विकास किया गया है। इसके बाद यह छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो गया है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
2. भोरमदेव मंदिर, कवर्धा
कवर्धा का भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ की प्राचीन स्थापत्य धरोहरों में शामिल है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में नागवंशी शासक रामचंद्र देव के शासनकाल में कराया गया था। मंदिर की पत्थर पर की गई बारीक नक्काशी और कलात्मक मूर्तियां इसकी खास पहचान हैं। इसी वजह से इसे ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ भी कहा जाता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI ने इसे संरक्षित स्मारक के रूप में सुरक्षित रखा है।
3. हटकेश्वर महादेव मंदिर, रायपुर
रायपुर में खारून नदी के किनारे स्थित हटकेश्वर महादेव मंदिर शहर की प्राचीन धार्मिक धरोहरों में गिना जाता है। रायपुर जिला प्रशासन के अनुसार मंदिर का निर्माण 1402 ईस्वी में कलचुरी शासक ब्रह्मदेव राय के शासनकाल में हजीराज नाइक ने कराया था। इस स्थान को महादेव घाट के नाम से भी जाना जाता है। सावन सोमवार और महाशिवरात्रि पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
4. कुलेश्वर महादेव मंदिर, राजिम
महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास करीब एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है। वर्तमान मंदिर का संबंध कलचुरी शासनकाल से जोड़ा जाता है। राजिम को प्राचीन समय से ‘छत्तीसगढ़ का प्रयाग’ कहा जाता है। कुलेश्वर महादेव यहां के प्रमुख आराध्य देव माने जाते हैं। राजिम कुंभ की धार्मिक परंपरा में भी इस मंदिर का विशेष महत्व है।
5. लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर
लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 6वीं-7वीं शताब्दी का माना जाता है। इसे छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने शिव मंदिरों में शामिल किया जाता है। इतिहासकार इसे शरभपुरी या प्रारंभिक सोमवंशी शासनकाल से जोड़ते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण ने यहां भगवान शिव की आराधना कर प्रायश्चित किया था। इसी मान्यता से मंदिर का नाम लक्ष्मणेश्वर पड़ा।
6. भूतेश्वर महादेव, गरियाबंद
गरियाबंद जिले के मरौदा गांव में स्थित भूतेश्वर महादेव की पहचान प्राकृतिक रूप से स्थापित विशाल शिवलिंग के रूप में है। यह किसी राजा द्वारा निर्मित मंदिर नहीं है। यहां स्थित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है। स्थानीय मान्यता है कि शिवलिंग का आकार समय के साथ बढ़ रहा है। इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंगों में से एक माना जाता है।
7. जलेश्वर महादेव मंदिर, बारसूर
बारसूर कभी चिंदक नागवंशी राजाओं की राजधानी था। 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच यहां कई भव्य मंदिरों का निर्माण कराया गया। इनमें जलेश्वर महादेव मंदिर प्रमुख है। विशाल पत्थरों से बना यह मंदिर बस्तर की प्राचीन शैव परंपरा और स्थापत्य कला की पहचान माना जाता है। मंदिर का इतिहास बारसूर के प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक वैभव से जुड़ा है।
8. जलेश्वर धाम
जलेश्वर धाम का इतिहास करीब 800 से 900 वर्ष पुराना माना जाता है। इतिहासकार इसे कलचुरी शासनकाल में निर्मित मंदिर मानते हैं। लंबे समय से यह अमरकंटक जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। मंदिर परिसर में स्थित प्राकृतिक जलकुंड इसकी खास विशेषता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार इसका जल कभी पूरी तरह नहीं सूखता।
सावन में क्यों खास हैं ये शिवधाम?
छत्तीसगढ़ के इन शिव मंदिरों की खासियत सिर्फ उनकी धार्मिक मान्यताएं नहीं हैं। इनके साथ प्रदेश का प्राचीन इतिहास, स्थापत्य और स्थानीय परंपराएं भी जुड़ी हैं। कहीं प्राकृतिक शिवलिंग श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है तो कहीं सदियों पुरानी पत्थर की नक्काशी मंदिर की पहचान है। सावन के दौरान इन शिवधामों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की खास रुचि रहती है।
5 FAQs
1. छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिव मंदिर कौन-कौन से हैं?
मधेश्वर महादेव धाम, भोरमदेव मंदिर, हटकेश्वर महादेव, कुलेश्वर महादेव, लक्ष्मणेश्वर महादेव, भूतेश्वर महादेव, जलेश्वर महादेव मंदिर और जलेश्वर धाम प्रमुख शिवधामों में शामिल हैं।
2. छत्तीसगढ़ का भोरमदेव मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
भोरमदेव मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला, पत्थर की बारीक नक्काशी और कलात्मक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। इसे ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ कहा जाता है।
3. भूतेश्वर महादेव की खासियत क्या है?
गरियाबंद के मरौदा गांव में स्थित भूतेश्वर महादेव प्राकृतिक रूप से स्थापित विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। इसे स्वयंभू माना जाता है।
4. हटकेश्वर महादेव मंदिर कहां स्थित है?
हटकेश्वर महादेव मंदिर रायपुर में खारून नदी के किनारे स्थित है। इस स्थान को महादेव घाट भी कहा जाता है।
5. सावन में छत्तीसगढ़ के शिव मंदिर क्यों खास होते हैं?
सावन भगवान शिव की आराधना का प्रमुख महीना माना जाता है। इस दौरान प्रदेश के प्रमुख शिवधामों में श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और दर्शन की विशेष रुचि रहती है।


