Dispute over the funeral: धमतरी जिले के श्यामतराई गांव में एक महिला के अंतिम संस्कार को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। रामपाल पंथ से जुड़े परिवार की महिला की मौत के बाद जब परिजन शव को गांव के मुक्तिधाम ले जा रहे थे, तो कुछ ग्रामीणों ने रास्ता रोककर विरोध किया। कई घंटे की समझाइश के बाद प्रशासन की मौजूदगी में महिला का अंतिम संस्कार गांव से बाहर किया गया।
शनिवार को श्यामतराई निवासी 50 वर्षीय गीता बाई साहू का निधन हो गया था। परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव को गांव के पारंपरिक मुक्तिधाम ले जा रहे थे।
बताया जा रहा है कि मृतका का परिवार पिछले 10 वर्षों से रामपाल पंथ से जुड़ा है। इसी धार्मिक पहचान को लेकर कुछ ग्रामीणों ने शव को गांव के मुक्तिधाम में ले जाने का विरोध कर दिया।
बांस-बल्लियां लगाकर रोका रास्ता
विरोध कर रहे ग्रामीणों ने मुक्तिधाम जाने वाले रास्ते पर बांस-बल्लियां लगाकर मार्ग बंद कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में पहले ही मुनादी कराई जा चुकी है कि जो लोग हिंदू धर्म की पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन नहीं करते या किसी अन्य पंथ से जुड़े हैं, उनका अंतिम संस्कार गांव के पारंपरिक मुक्तिधाम में नहीं होगा। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया।

समझाइश के बाद गांव के बाहर हुआ अंतिम संस्कार
विवाद की सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया गया।
काफी समझाइश के बाद प्रशासन ने गांव से बाहर एक स्थान तय किया। प्रशासन की मौजूदगी में महिला के शव को वहां ले जाकर दफनाया गया। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई।
घंटों तनावपूर्ण रहा माहौल
इस विवाद के कारण गांव में कुछ समय तक तनाव का माहौल बना रहा। संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर सुरक्षा व्यवस्था भी रखी गई। हालांकि किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
उठे सवाल: अंतिम संस्कार का अधिकार बनाम परंपरा
इस घटना ने अंतिम संस्कार के अधिकार, धार्मिक आस्था और गांव की पारंपरिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर ग्रामीण मुक्तिधाम के उपयोग पर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परिजनों को अलग स्थान पर अंतिम संस्कार करना पड़ा। पूर्व में बस्तर इलाके के गांवों में धर्मांतरित आदिवासी ईसाई परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए कई बार रोका जा चुका है। मगर ऐसा पहली बार हुआ है जब हिन्दू समुदाय में ही किसी पंथ विशेष के मानने वालों का विरोध हुआ है। अगर इस विवाद का समय रहते सर्वमान्य हल नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
धमतरी जिले में ही ईसाई धर्मांतरण मामले में हुआ विवाद
धमतरी जिले में कल ही ईसाई धर्मांतरित बुजुर्ग महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हो गया। हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं और कुछ ग्रामीणों ने ईसाई रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किए जाने पर आपत्ति जताई।

मामला भखारा थाना क्षेत्र के रांवा-कुर्रा गांव का है। रविवार शाम विवाद की सूचना मिलने के बाद काफी देर तक समझाइश का दौर चला। इसके बाद परिवार हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करने के लिए सहमत हो गया। सहमति बनने के बाद मामला शांत हुआ।
फिलहाल प्रशासन ने मामले को संवेदनशील मानते हुए स्थिति पर नजर बनाए रखी है। कोई आधिकारिक बयान या आगे की कार्रवाई की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
FAQ: धमतरी अंतिम संस्कार विवाद
कहां हुआ विवाद?
धमतरी जिले के श्यामतराई गांव में।
विवाद की वजह क्या थी?
रामपाल पंथ से जुड़े परिवार की महिला का शव गांव के पारंपरिक मुक्तिधाम में ले जाने का विरोध।
ग्रामीणों ने क्या किया?
मुक्तिधाम के रास्ते पर बांस-बल्लियां लगाकर रास्ता बंद कर दिया।
अंतिम संस्कार कहां हुआ?
प्रशासन की मौजूदगी में गांव से बाहर तय स्थान पर दफनाकर।
स्थिति अभी कैसी है?
अंतिम संस्कार के बाद स्थिति सामान्य है, प्रशासन निगरानी कर रहा है।


