Chhattisgarh Politics: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर उन्होंने दुनिया भर के आदिवासी समाज को एक ट्वीट तक कर बधाई नहीं दी। बघेल ने कहा कि देश की राष्ट्रपति और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री दोनों आदिवासी समाज से आते हैं, ऐसे में आदिवासी दिवस पर बधाई नहीं देना दुर्भाग्यजनक है।
बघेल बोले- हमारी सरकार ने घोषित किया था सार्वजनिक अवकाश
भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान 9 अगस्त को आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय विश्व आदिवासी दिवस बड़े स्तर पर और धूमधाम से मनाया जाता था। बघेल ने कहा कि मौजूदा सरकार के सामने अब घोषित अवकाश को निरस्त करने की हिम्मत नहीं है।
पिछले साल का कार्यक्रम रद्द करने का लगाया आरोप
बघेल ने पिछले साल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि आदिवासी दिवस के दिन मुख्यमंत्री का इंडोर स्टेडियम जाने का कार्यक्रम तय था और उसका प्रोटोकॉल भी जारी हो चुका था। उनके मुताबिक बाद में यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर ऊपर से दबाव आया था। उन्होंने कहा कि यह दबाव कहां से आया, चाहे आरएसएस कार्यालय से या दिल्ली से, इस बारे में वह निश्चित तौर पर नहीं कह सकते। हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री और देश में आदिवासी राष्ट्रपति हैं, तब आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज को बधाई तक क्यों नहीं दी जा रही है।
मुख्यमंत्री पर लगाया ऊपर से अनुमति लेने का आरोप
भूपेश बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को अपने कार्यक्रमों के लिए ऊपर से अनुमति लेनी पड़ती है। उन्होंने मौजूदा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदिवासी दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी मुख्यमंत्री की ओर से समाज को बधाई नहीं दी गई। बघेल के इन आरोपों के बाद छत्तीसगढ़ में एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। अब इस मामले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय या सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है।


