Surya Grahan: 12 अगस्त 2026 (बुधवार) को भाद्रपद अमावस्या तिथि पर अश्लेषा नक्षत्र और व्याघात/व्यतीपात योग में खग्रास सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना ही नहीं है, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार ग्रहण का प्रभाव जगत के समस्त प्राणियों और प्रकृति पर किसी न किसी रूप में अवश्य पड़ता है। जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य एक ही सीधी रेखा में आते हैं और चंद्रमा सूर्य को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है, तो इस अवस्था को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
सूर्य ग्रहण के विभिन्न प्रकार और खगोलीय नियम
वैज्ञानिक और खगोलशास्त्र के दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है:
पूर्ण सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता है और चारों ओर अंधेरा छा जाता है, तो इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं।
खंडग्रास या आंशिक सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा सूर्य के केवल कुछ हिस्से को ही ढक पाता है, तो इसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
वलयाकार सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढकता है और उसके किनारों से रोशनी का एक चमकदार छल्ला (रिंग ऑफ फायर) बनता दिखाई देता है।
खगोलशास्त्रियों के गणितीय आकलन के अनुसार, 18 वर्ष और 11 दिन की समयावधि में लगभग 41 सूर्य ग्रहण और 29 चंद्र ग्रहण घटित होते हैं। एक वर्ष में कम से कम 2 और अधिकतम 5 सूर्य ग्रहण तक हो सकते हैं।
भारत में अमान्य रहेगा ग्रहण, नहीं लगेगा सूतक काल
12 अगस्त 2026 का यह खग्रास सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, ग्रीनलैंड, उत्तरी अटलांटिक महासागर और उत्तरी प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में दृश्यमान होगा। खग्रास सूर्य ग्रहण की कुल अवधि लगभग 1 घंटा 36 मिनट की होगी।
चूंकि यह ग्रहण भारतीय भूभाग में दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए भारत में इसका धार्मिक महत्व और सूतक काल मान्य नहीं होगा। श्रद्धालुओं और आम जनमानस को इसके सूतक या नियमों के पालन को लेकर किसी भी प्रकार की शंका रखने की आवश्यकता नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: क्या 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
उत्तर: नहीं, यह खग्रास सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
प्रश्न 2: क्या भारत में इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा?
उत्तर: चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, इसलिए इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा।
प्रश्न 3: 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण किन-किन देशों/क्षेत्रों में दिखाई देगा?
उत्तर: यह ग्रहण पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, ग्रीनलैंड, उत्तरी अटलांटिक और उत्तरी प्रशांत महासागर क्षेत्र में दिखेगा।
प्रश्न 4: सूर्य ग्रहण कब और कैसे लगता है?
उत्तर: जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच में आकर सूर्य के प्रकाश को आंशिक या पूर्ण रूप से रोक लेता है, तब सूर्य ग्रहण लगता है।
प्रश्न 5: खग्रास सूर्य ग्रहण की कुल अवधि कितनी होगी?
उत्तर: 12 अगस्त 2026 को लगने वाले खग्रास सूर्य ग्रहण की कुल अवधि लगभग 1 घंटा 36 मिनट होगी।


