छत्तीसगढ़ बनेगा 5वां फॉसिल्स हैरिटेज, 28 करोड़ साल पुराने समुद्री जीवाश्म होंगे संरक्षित

रायपुर/बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में हसदेव नदी तट पर 28 करोड़ साल पुराने मैरीन फॉसिल्स पार्क को संरक्षित एवं बायोडायवर्सटी हैरीटेज साइट चिह्नांकित करने के लिए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट लखनऊ की टीम 4 से 6 अगस्त के बीच फॉसिल्स पार्क का जायजा लेने पहुंचेगी और गोंडवाना मैरीन फॉसिल्स पार्क को विकसित करने पर अपना सुझाव देगी।

बता दें कि अपर प्रधान मुख्य संरक्षक एवं बायो डायवर्सिटी बोर्ड रायपुर के सदस्य सचिव अरुण पांडेय के नेतृत्व में पिछले महीने जांच टीम पहुंची थी। जांच टीम ने राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट लखनऊ से सर्वे कराने सिफारिश की थी। गौरतलब है कि मनेंद्रगढ़ वनमंडल में करीब एक दशक पहले हसदेव नदी तट पर समुद्री जीवों के जीवाश्म मिले थे।

अतीत में समुद्र का हिस्सा था कोरिया क्षेत्र

मनेंद्रगढ़ में आमाखेरवा के पास हसदेव नदी और हसिया नदी के बीच करीब एक किलोमीटर के क्षेत्र में समुद्री जीवों और वनस्पतियों के जीवाश्म हैं। इनमें बाइवाल्व मोलस्का, युरीडेस्मा और एवीक्युलोपेक्टेन सहित अन्य समुद्री जीवों के जीवाश्म मौजूद हैं। माना जाता है कि करोड़ों साल पहले यह हिस्सा समुद्र के नीचे था और भूगर्भ में हलचल के बाद ऊपर आया होगा।

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हसदेव नदी क्षेत्र में दबा है कोयले का विपुल भंडार

बता दें हसदेव नदी क्षेत्र में प्राकृतिक कोयले का विपुल भंडार दबा हुआ है। यहां एसईसीएल द्वारा अनेक खदानों का संचालन किया जा रहा है। जिसमें मनेंद्रगढ़ का झागराखांड,चिरिमिरी व चरचा की खदानें प्रमुख हैं। ये खदानें गोंडवाना काल में करोड़ साल पहले जंगलों व समुद्री जीवों के धरती के नीचे दबने से निर्मित हुई हैं। करोड़ों साल टेक्टोनिक मूवमेंट के बाद भी ये समुद्रीजीव आज भी हसदेव क्षेत्र में फॉसिल्स के रूप में मौजूद हैं, जिन्हें अब संरक्षित किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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