पुलिस की ‘थर्ड डिग्री’ से रसूखदार भी नहीं बच पाते, थानों में मानवाधिकार को सबसे ज़्यादा खतरा : सीजेआई

नई दिल्ली। पुलिस अपने नाम से ही बदनाम है। लोगों से बर्ताव को लेकर उसकी कारगुजारियां जगजाहिर हैं। लेकिन जब सीजेआई खुद चिंता जताएं तो स्थिति की गंभीरता का अंदाजा अपने आप ही लग जाता है। साफ हो जाता है कि खाकी वर्दीधारी किस तरह से लोगों के साथ सलूक करते हैं। उनकी जद से रसूखदार लोग भी बाहर नहीं हैं।

नालसा के ‘न्याय तक पहुंच’ कार्यक्रम में सीजेआई एनवी रमन्ना ने कहा कि पुलिस की ‘थर्ड डिग्री’ से रसूखदार भी नहीं बच पाते हैं। उन्होंने नालसा से देश में पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील बनाने को कहा।

उन्होंने कहा कि वीआईपी और कमजोर लोगों के बीच न्याय तक पहुंच के अंतर को पाटना जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक संस्था के रूप में न्यायपालिका नागरिकों का विश्वास हासिल करना चाहती है, तो हमें आश्वस्त करना होगा कि हम सबके लिए मौजूद हैं।

सीजेआई ने कहा कि कानूनी सहायता के संवैधानिक अधिकार और मुफ्त कानूनी सहायता सेवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी का प्रसार पुलिस की ज्यादतियों को रोकने के लिए आवश्यक है।

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उन्होंने कहा कि प्रत्येक थाने, जेल में डिस्प्ले बोर्ड और होर्डिंग लगाना इस दिशा में एक कदम है। नालसा को देश में पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए कदम उठाना चाहिए।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।