यहां 15 दिन में कुल 117 स्कूली छात्र हुए संक्रमित... कुछ शिक्षकों की रिपोर्ट भी आई कोरोना पॉजिटिव

टीआरपी डेस्क। भारत में इस साल बच्चों को कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन नहीं लग पाएगी। कोविड टास्क फोर्स की रिसर्च टीम का कहना है कि पहली और दूसरी लहर के दौरान बच्चों पर हुए शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि दो से 12 साल तक के बच्चों को फिलहाल उतना खतरा नहीं है।

यही वजह है कि इस उम्र के बच्चों को 2022 की पहली तिमाही के दौरान टीकाकरण किया जाए। रिसर्च टीम ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को इसके लिए सिफारिश भी की है। देश में बच्चों को लगाई जाने वाली वैक्सीन की पूरी तैयारियां हो चुकी हैं।

18 साल तक के किशोरों को लगाने के लिए वैक्सीन के ट्रायल हो चुके हैं। मगर इस बीच आईसीएमआर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नेशनल कोविड टास्क फोर्स टीम की टीकाकरण करने वाली रिसर्च टीम की कुछ अलग सिफारिशें हैं। इस टीम का कहना है कि अगले साल जनवरी से लेकर मार्च के बीच में बच्चों को वैक्सीन दिए जाने का पूरा प्रस्ताव है।

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नेशनल कोविड टास्क फोर्स के डॉक्टर एनके अरोड़ा का कहना है 18 साल तक के किशोरों के लिए वैक्सीन के ट्रायल हो चुके हैं। चूंकि सिफारिश यही है कि दिसंबर के बाद शुरुआत के तीन महीनों में इस आयु वर्ग के लोगों का टीकाकरण किया जाए। इसलिए अगर कोई बहुत इमरजेंसी नहीं होगी तो दो से 12 और 13 से 18 साल के आयु वर्ग का टीकाकरण 2022 की जनवरी से मार्च के बीच में शुरू किया जाएगा।

डॉक्टर अरोड़ा का यह भी कहना है विशेषज्ञों की टीम की सिफारिश है कि स्कूल में आने वाले सभी स्टाफ का अगर टीकाकरण हो चुका है तो बच्चों के स्कूल खोलने में कोई भी दिक्कत नहीं होनी चाहिए। लेकिन यह सारा फैसला संबंधित राज्यों पर निर्भर करता है।

देश में टीकाकरण को रफ्तार देने और उसकी पूरी व्यवस्था पर नजर रखने वाली कमेटी के चेयरपर्सन डॉक्टर एनके अरोड़ा कहते हैं कि उनकी पूरी कोशिश है कि दिसंबर के अंत तक सभी लोगों को वैक्सीनेट कर दिया जाए।

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