रायपुर। अपार शक्ति की देवी मां दुर्गा की पूजा को समर्पित शारदीय नवरात्रि (Navratri 2019) आज से प्रारंभ होकर 7 अक्टूबर सोमवार तक रहेगी। इस बार नवरात्रि में किसी भी तिथि की वृद्धि या छय नहीं हुई है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है एवं दसवें दिन विजय दशमी (दशहरा) का पर्व मनाया जाता है।

नवरात्रि क्यों मनाई जाती है

देवी पुराणों के अनुसार कहा जाता है कि दैत्य गुरु शुक्राचार्य के कहने पर दैत्यों ने घोर तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और वर मांगा कि उन्हें कोई पुरुष, जानवर और उनके शस्त्र न मार सकें। वरदान मिलते ही असुर अत्याचार करने लगे, तब देवताओं की रक्षा के लिए ब्रह्माजी ने वरदान का भेद बताते हुए बताया कि असुरों का नाश अब स्त्री शक्ति ही कर सकती है। ब्रह्माजी के निर्देश पर देवों ने नौ दिनों तक मां पार्वती को प्रसन्न किया और उनसे असुरों के संहार का वचन लिया। असुरों के संहार के लिए देवी ने रौद्र रूप धारण किया था इसीलिए शारदीय नवरात्र शक्ति-पर्व के रूप में नौ दिनों तक मनाया जाता है।

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कब है घट स्थापना मुहूर्त

घट स्थापना मुहूर्त एवं पूजन 29 सितंबर रविवार को प्रातः 11:36 से 12:24 तक है। इस दिन प्रतिपदा तिथि रात्रि 8:13 तक रहेगी अतः इस अवधि तक घट स्थापना देवी प्रतिमा का आवाहन कर लेना उत्तम होगा। इस दिन है हस्त नक्षत्र एवं मानस योग रहेगा जबकि शुक्र एवं बुध की युति आर्थिक दृष्टिकोण से देश को सुदृढ़ता प्रदान करने वाली होगी। जबकि शनि चंद्रमा के विष योग होने से आपसी मतभेद एवं मन को अशांत होने से बचाने के लिए नवरात्रि विधि का पालन करना चाहिए। दुर्गाष्टमी महाष्टमी रविवार 6 तारीख को मनाई जाएगी जबकि नवरात्रि व्रत पारणा 7 अक्टूबर सोमवार दोपहर 12:37 के बाद करनी होगी।

कैसे करें माता की स्थापना

नवरात्रि के प्रतिपदा के दिन एक लकड़ी के आसन पर, लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा का चित्र या मूर्ति स्थापित करें ,मां दुर्गा के प्रतिमा के बाएं तरफ कलश की स्थापना करें। उस कलश में आम या अशोक के पत्ते लगाएं। नारियल कलश के ऊपर रखें एवं मौली से बांध दें। गौरी गणेश की स्थापना सहित नवग्रह, षोडश मातृका, सप्त घृत मातृका, चतुष्टय योगिनी देवी का ध्यान स्मरण करें। तत्पश्चात टोकरी या किसी कलश में जवा बोएं, यह समृद्धि एवं सुख को प्रदान करने वाली बताई गई है। तत्पश्चात घी का दीपक प्रज्वलित करें। पश्चात जल से स्नान करावे, पंचामृत का स्नान कराकर सिंदूर मां को अर्पण करके नैवेद्य, धूप, दीप, वस्त्र सहित सुहाग की सामग्री मां को अर्पण करें, पूजा करें एवं सपरिवार एकत्र होकर मां की आरती करें।

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9 दिनों तक करें माता की अराधना

नवरात्रि व्रत को नियम से व्रत पूजन करने वाले को तुरंत ही इसका फल प्राप्त होता है। इस संसार में ऐसी कोई भी मुराद नहीं जो मां दुर्गा पूरी नहीं कर सकती। यह व्रत रविवार प्रतिपदा से लेकर सोमवार नवमी पर्यंत नौ दिनों तक रखा जाता है यदि कोई 9 दिनों तक व्रत रखने में असमर्थ हो तो एक समय का व्रत भी रख सकते हैं। व्रत का मानसिक संकल्प लेकर देवी पूजा सहित व्रत को प्रारंभ करें। इन 9 दिनों तक झूठ क्रोध एवं लोगों से बचें। शराब मांस का भक्षण वर्जित है। चोरी, लड़ाई झगड़ों से दूर रहकर सभी के लिए प्रेम और समर्पण का भाव रखें तो निश्चय ही मां जगदंबा प्रसन्न होकर आपके सभी मनोरथ पूर्ण करेंगी। जय माता दी।

ज्योतिष दर्पण
पंडित कृष्णकांत चतुर्वेदी

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