छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
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रायपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में शिक्षक की नियुक्ति के संबंध में आदेश दिया है कि भर्ती आवेदन में जिले का निवासी होने की शर्त नहीं थी, इसलिए आवेदक को अपात्र नहीं कर सकते। साथ ही हाईकोर्ट के जस्टिस पी. सैम कोशी ने शिक्षा सचिव और डीईओ को भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि कोर्ट ने गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले से जुड़े मामले पर सुनवाई की। जहां आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में शिक्षक सहित अन्य पदों पर नियुक्तियों के लिए 4 अगस्त 2021 को आवेदन जारी किया गया। इसमें जांजगीर-चांपा जिले के शक्ति कुमार ने बायोलॉजी शिक्षक के लिए आवेदन किया था। इसके बाद 19 अगस्त को प्रोविजनल सूची जारी की गई। इसमें शक्ति सहित चार लोगों के नाम थे। इस सूची के आधार पर दावा-आपत्ति मंगाई गई थी। बाद में चारों को यह कहकर अपात्र घोषित कर दिया गया कि वे गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मूल निवासी नहीं हैं।

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जिसके बाद शक्ति ने अधिवक्ता घनश्याम कश्यप के माध्यम से इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। अधिवक्ता कश्यप के मुताबिक शासन ने यह पक्ष दिया कि गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी पदों पर स्थानीय को ही नियुक्ति दी जानी है। इसके लिए शासन के उस फैसले का हवाला दिया गया, जिसमें बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों के साथ कोरबा और बाद में गौरेला पेंड्रा मरवाही को भी शामिल किया गया।

अधिवक्ता ने कहा कि विज्ञापन में सिर्फ भृत्य व चौकीदार के लिए यह शर्त रखी गई थी। इसके बाद शासन की ओर से नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का तर्क रखा गया। वादी की ओर से इस पर भी आपत्ति की गई। इस मामले में हाईकोर्ट के जस्टिस पी. सैम कोशी ने शासन के तर्कों को स्वीकार नहीं किया और शक्ति कुमार को पात्र मानते हुए आगे भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

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