रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के 366 करोड़ के डायरी कांड मामले में पुलिस ने जीआर चंद्राकर को इसके साथी होम्योपैथी कॉलेज के सचिव संजय कुमार ठाकुर और टायपिस्ट कपिल कुमार देवदास को पकड़ा है।

पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी चंद्राकर को रिटायरमेंट के बाद संविदा पर पोस्टिंग चाहिए थी। जब ये पोस्ट नहीं मिली तो इसने जिला शिक्षा अधिकारी ए.एन.बंजारा, संयुक्त संचालक के.सी.काबरा, तत्कालीन ओ.एस.डी. आर.एन. सिंह, ए.बी.ई.ओ. प्रदीप शर्मा और मंत्री के निज सचिव अजय सोनी के खिलाफ एक घोटाले की कहानी रच दी। एक डायरी में मंत्री प्रेम साय टेकाम का नाम लिखकर हजारों कर्मचारियों से पोस्टिंग, ट्रांसफर के नाम पर रुपए लेने की बात लिखी।

कुल 366 करोड़ के लेन-देन का जिक्र किया। एक शिकायत पत्र तैयार करके इसमें लोक शिक्षण संचालनालय के उप संचालक आशुतोष चावरे के नाम भी शामिल कर लिया। ये शिकायती पत्र कई अफसरों, मीडिया हाउस और नेताओं को डाक के जरिए भेज दिए। जिसके बाद यह कांड मीडिया के सुर्खियों में आया।

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ऐसा यह पहली बार नहीं है, रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी रह चुके जीआर चंद्राकर पर पहले भी आर्थिक गड़बड़ी करने का आरोप लग चुका है। जीआर चंद्राकर ने रिटायरमेंट से पहले लगभग 73 लाख रुपए के भ्रष्टाचार का भी आरोप है।

अधिकारी पर 8 निजी स्कूलों को निजी खातों में आरटीई के तहत गरीब बच्चों के पैसों का भुगतान करने का आरोप लगाया गया है। जिनमें ज्यादातर स्कूल कई साल पहले बंद हो चुके थे। ऐसे स्कूलों में भी राशि का भुगतान हुआ जहां कोई भी बच्चा आरटीई के तहत नहीं पढ़ता था।

यह रकम राइट टू एजुकेशन RTE के तहत पढ़ने वाले बच्चों की थी। कुछ स्कूलों को रुपए देने की बजाए रकम स्कूल के संचालक मंडल से जुड़े लोगों के खाते में दी गई।

क्या है राइट टू एजुकेशन

राज्य सरकार इस योजना के तहत गरीब बच्चों को बड़े स्कूलों में दाखिला दिलवाती है। उनका खर्च वहन करती है। इन बच्चों से जुड़ी फीस और अन्य शुल्क के पैसे स्कूलों को सरकार की तरफ से दिए जाते हैं।

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रिश्तेदारों को खिलाई मलाई

उनपर आरोप है कि उन्होंने राइट टू एजुकेशन की आड़ में अपने रिश्तेदारों को भी फायदा पहुंचाया। हालांकि बाद में 73 लाख में से करीब 34 लाख रुपए वापस भी आ गए। लेकिन इस भ्रष्टाचार की शिकायत विभाग द्वारा नहीं की गई। न ही इस मामले में एफआईआर दर्ज किया गया।

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