कच्चे तेल की आग आज भी कम होने का नाम नहीं ले रही थी। इसका प्रभाव शाम को भी भारतीयशेयर बाजारों पर दिखा। जब सेंसेक्स 324 तो निफ्टी ने 84 अंकों का गोता लगाया। दरअसलअमेरिका ने भारत सहित आठ देशों-जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, तुर्की, इटली, यूनान औरचीन को ईरान से कच्चा तेल खरीदने की जो रियायत दी थी, उसकी समय सीमा दो मई को समाप्तहो जाएगी। इसके पीछे कारण ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर अधिकतम दबावबनाना चाहते हैं ताकि वह अपना परमाणु कार्यक्रम स्थगित कर दे। नई दिल्ली तेहरान से तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। भारत ईरान से तेल का आयात बंद करदे तो नई दिल्ली का ऊर्जा क्षेत्र और आर्थिक सुरक्षा दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। इस संकटका उपाय है कि भारत ईरान से तेल की निर्भरता कम कर दे, लेकिन इसका प्रतिकूल असर भारत-ईरान

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के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ना स्वाभाविक है। पिछले साल मई में इस संकट की शुरुआत हुई थी, जब ट्रंपने अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए मई, 2018 में ईरान पर दबाव बनाने के लिए उसके साथहुए परमाणुसमझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था। जुलाई, 2015 में ईरान और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद केपांच स्थायी सदस्यों के बीच परमाणु समझौता हुआ था। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नरम रुख अपनाते हुए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने केबदले कुछ रियायतें दी थीं, लेकिन ट्रंप का मानना था कि ईरान आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। परमाणुसमझौते की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है, इसीलिए उन्होंने यह समझौता तोड़ दिया था। ईरान के विरुद्धअमेरिका की कठोर नीति का असर भारत ही नहीं समूचे विश्व पर पड़ेगा क्योंकि ईरान से तेल की सप्लाईठप होने से पूरे विश्व में तेल की कमी होगी। इससे तेल की कीमतों के साथ अन्य पेट्रोलियम पदार्थो की
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कीमतों में भी ईजाफा होगा। अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन करवाना चाहता है। वहां 1979 में इस्लामिकक्रांति हुई थी, जिसके बाद ईरान को इस्लामिक गणराज्य घोषित कर दिया गया था। तब से वहां धर्मतंत्र है,और देश का शासन धर्मगुरुओं द्वारा चलाया जाता है। ट्रंप धर्मगुरुओं के शासन को उखाड़ फेंकना चाहते हैं।इस काम में उन्हें कुछ प्रमुख अरब देशों और इस्रइल का सहयोग प्राप्त है, लेकिन अहम सवाल है कि भारतअपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को क्षति पहुंचने से रोकने का क्या उपाय करे? जाहिर है कि उसेईरान पर तेल की निर्भरता का वैकल्पिक रास्ता ढूंढ़ना होगा। Chhattisgarh से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Twitter पर Follow करें  और Youtube  पर हमें subscribe करें।