MEDICAL LEAVE

बालोद। छत्तीसगढ़ में ऐसे समय में जब पढाई पीक पर है, दो शिक्षक मेडिकल लीव के बहाने पर्यटन के लिए गोवा पहुंच गए। इतना ही नहीं दोनों ने मौज-मस्ती की तस्वीरें स्टेटस में लगा दीं। अब यही तस्वीरें उनके लिए गले की हड्डी बन गई हैं। जिले के शिक्षा अधिकारी ने इसकी जानकारी मिलने पर BEO को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

टीचिंग के साथ प्रॉपर्टी का भी बिजनेस

बालोद के सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले दो शिक्षकों की चर्चा पूरे जिले में हैं। बताया जाता है कि दोनों शिक्षक जमीन की दलाली का काम भी करते हैं। दोनों शिक्षकों ने मेडिकल लीव लिया और फिर जमीन की दलाली करने वाले कुछ लोगों के साथ छुट्टियां मनाने के लिए गोवा चले गए। इनका फोटो स्थानीय संकुल ग्रुप में वायरल हुआ, तो खबर इनके विभाग तक पहुंच गई। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी मुकेश साहू ने दोनों को नोटिस जारी कर मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

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दूसरा व्यवसाय करने के लिए होता है नियम

यह मामला बालोद जिले के गुरुर विकासखंड का है। जहां के कनेरी हाईस्कूल में पढ़ाने वाले मनहरण लाल सिन्हा और ठेकवा विद्यालय के शिक्षक टिभु राम गंगबेर हैं। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ललित चंद्राकर ने बताया कि दोनों शिक्षकों के खिलाफ पहले आरोप लगा था कि वे जमीन खरीदी-बिक्री का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि शासकीय कर्मचारी बिना विभाग को जानकारी दिए दूसरा काम नहीं कर सकते। अब मेडिकल लीव पर पर्यटन पर जाने की शिकायत पर गंभीरता से जांच की जा रही है।

धंधे में फायदे के बाद चले गए घूमने

जानकारी मिली हैं कि दोनों शिक्षक अध्यापन कार्य के समय जमीन खरीदी बिक्री में व्यस्त रहते हैं और विद्यालय से अक्सर गायब रहते हैं। पूर्व में इसकी जांच की जिम्मेदारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी को ही मिली थी, पर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कुछ दिनों पहले इन्होंने दलाली के जरिये कई जमीनों की रजिस्ट्री कराई थी। इसके बाद इनकी गोवा ट्रिप चर्चा में है। दोनों फ्लाइट से गोवा गए थे। इनके स्टेटस में लगाई गई फोटो में बीयर की बोतलें भी दिख रही हैं।

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अधिकांश कर्मी इसी तरह लेते हैं छुट्टियां

शासकीय विभागों में अधिकारी-कर्मचारियों के लिए अलग-अलग तरह की छुट्टियां होती हैं। इनमे EL और CL के अलावा मेडिकल लीव भी शामिल है। चूंकि मेडिकल के नाम पर लंबी छुट्टी मिल जाती है, इसलिए शासकीय सेवक अक्सर बीमार होने के नाम पर मेडिकल लीव लेते हैं और अवकाश पर चले जाते हैं। इसके लिए डॉक्टर द्वारा तैयार मेडिकल सर्टिफिकेट की जरुरत होती है, जो अब तक आसानी से मिल जाया करता था, मगर कई मामलो में मेडिकल सर्टिफिकेट देना डॉक्टरों के लिए मुसीबत बन गया और उनके खिलाफ जांच और FIR तक हो गई, इसलिए अब डॉक्टर भी आंख मूंदकर कलम चलाने से डरने लगे हैं।

बहरहाल बालोद के शिक्षा विभाग में हुए इस मामले में DEO मुकेश साहू का कहना है कि अब तो यह जांच में ही पता चल सकेगा कि इन शिक्षकों ने स्कूल में कौन सा आवेदन दिया है। जिसके बाद ही जांच की दिशा तय होगी और आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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